विशेष रिपोर्ट / महानगर मेट्रो न्यूज़ : अहमदाबाद। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव और गुजरात संगठन प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमित चावड़ा और विधानसभा कांग्रेस पार्टी के नेता तुषार चौधरी ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र की बीजेपी सरकार पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर टैक्स लगाकर देश की आम जनता के साथ खुलेआम धोखाधड़ी और विश्वासघात कर रही है।
14 सितंबर 2026: देश के लिए ‘डिजिटल यू-टर्न’ और विश्वासघात का दिन
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 14 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार और एनपीसीआई द्वारा P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) लेन-देन पर 0.4% टैक्स लगाने की घोषणा की गई है, जो 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इस फैसले को देश के इतिहास में “डिजिटल यू-टर्न” करार देते हुए उन्होंने जोड़ा कि सरकार के पास संसद की मंजूरी के बिना इस टैक्स की दर 1% या 2% तक बढ़ाने और P2P (पर्सन-टू-पर्सन) सहित सभी श्रेणियों पर लगाने की मनमानी ताकत आ गई है।
अमेरिकी कंपनियों के सामने बीजेपी सरकार ने घुटने टेके?
प्रेस विज्ञप्ति में गंभीर आरोप लगाया गया है कि “द पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट” के सेक्शन 10-ए में चुपके से संशोधन करके यह टैक्स लगाया गया है। भारत में होने वाले 80% यूपीआई लेन-देन ‘फोन पे’ और ‘गूगल पे’ जैसी विदेशी/अमेरिकी कंपनियों द्वारा होते हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या विदेशी कंपनियों का मूल्यांकन बढ़ाने और वीजा तथा मास्टरकार्ड के हितों की रक्षा के लिए मुफ्त सेवा देने वाले यूपीआई प्लेटफॉर्म पर आम भारतीयों की कीमत पर यह टैक्स थोपा गया है?
महंगाई की आग में झुलसेंगे आम नागरिक और व्यापारी
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. हिरेन बैंकर द्वारा जारी बयान के अनुसार, वर्ष 2026-27 में ₹2,000 से अधिक मूल्य के P2M लेन-देन पर सालाना ₹5,040 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यह बोझ आखिरकार छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और आम जनता की जेब पर ही आना है। जब आरबीआई सरप्लस फंड दे रही है, सरकारी बैंक हजारों करोड़ का मुनाफा कमा रहे हैं और एनपीसीआई खुद ₹1,900 करोड़ के फायदे में है, तब सुरक्षा और सब्सिडी के नाम पर टैक्स लगाने का बहाना पूरी तरह निराधार और झूठा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि ‘डिजिटल भारत’ के नाम पर आम नागरिकों की जेब काटने के इस फैसले के खिलाफ देशभर में जनाक्रोश पैदा होगा और सरकार से इस जनविरोधी टैक्स को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।

