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बड़ी खबर : चुनावी चंदे की आड़ में काले धन का ‘हवाला’ खेल

‘AAP’ के फंडिंग नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश! दिल्ली से सूरत आ रहे लाखों रुपये जब्त, सत्येंद्र जैन के PA का नाम आया सामने

सूरत | विशेष संवाददाता : गुजरात की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब सूरत क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से सूरत तक फैले एक हाई-प्रोफाइल ‘हवाला नेटवर्क’ का भंडाफोड़ किया। आरोप है कि यह पैसा आम आदमी पार्टी (AAP) के चुनावी खर्चों के लिए ‘ब्लैक मनी’ के रूप में भेजा जा रहा था। इस कार्रवाई ने राजधानी से लेकर डायमंड सिटी तक हड़कंप मचा दिया है।

दिल्ली से सूरत: ऐसे जुड़ रही है ‘हवाला’ की कड़ियां

सूरत क्राइम ब्रांच की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। चुनावी माहौल के बीच काले धन को सफेद करने और उसे प्रचार में झोंकने की इस साजिश में बड़े नाम शामिल हैं:

1 मुख्य आरोपी और कनेक्शन: जांच में सामने आया कि दिल्ली का हिमांशु पाहुजा मुख्य हैंडलर है, जो दिल्ली से पैसे भेज रहा था। सूरत में इस रकम को आकाश मिश्रा और अजय तिवारी नाम के व्यक्ति रिसीव कर रहे थे।
2 सत्येंद्र जैन का नाम उछला: सबसे सनसनीखेज खुलासा यह है कि पकड़ा गया आरोपी आकाश मिश्रा दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का पीए (PA) बताया जा रहा है। वहीं, हिमांशु पाहुजा ‘आप’ नेता सुरेंद्र भारद्वाज का करीबी माना जा रहा है।
3 सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ सच: क्राइम ब्रांच को ऐसे पुख्ता सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे हैं, जिनमें आरोपी ऑफिस में बैठकर नोटों की गड्डियां गिनते साफ नजर आ रहे हैं।

ऑपरेशन ‘आंगड़िया’: हर महीने आते थे लाखों रुपये

पूछताछ में पता चला है कि यह कोई एक बार का मामला नहीं है। आंगड़िया (पारंपरिक कूरियर सेवा) के जरिए दिल्ली से हर महीने लाखों रुपये सूरत भेजे जा रहे थे। इस पैसे का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने और संगठन की गतिविधियों के लिए किए जाने का संदेह है।

एजेंसियां सतर्क: आयकर विभाग की होगी एंट्री

सूरत क्राइम ब्रांच ने अजय तिवारी और आकाश मिश्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ तेज कर दी है। पुलिस के साथ-साथ अब आयकर विभाग (Income Tax Department) भी इस जांच में शामिल हो सकता है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक कुल कितना पैसा ट्रांसफर किया गया और इसका असली स्रोत क्या है।

महानगर मेट्रो का सवाल: क्या यह ‘कट्टर ईमानदारी’ का असली चेहरा है?
चुनाव के समय पकड़ा गया यह हवाला नेटवर्क कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
क्या राजनीति में शुचिता का दावा करने वाली पार्टी के जड़ें काले धन से सींची जा रही हैं?
क्या दिल्ली की सत्ता का इस्तेमाल गुजरात के चुनावों को ‘हवाला’ के जरिए प्रभावित करने के लिए हो रहा है?

विपक्षी दलों ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सूरत क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले काले धन की यह जंग अभी और तेज होने वाली है।

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