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दिशा सालियान डेथ केस FIR में आदित्य ठाकरे का नाम, महाराष्ट्र की सियासत गरमाई, सुप्रिया सुले बोलीं- हैरान हूं

NCP SP नेता सुप्रिया सुले ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में सीबीआई के प्राथमिकी दर्ज किए जाने को आश्चर्यजनक बताया। दावा किया कि मौजूदा सरकार ने पहले इस मामले को बंद कर दिया था।

पुणे : NCP (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि वह दिशा सालियन की मौत के मामले में आए नए घटनाक्रम से हैरान हैं। उन्होंने कहा कि वह स्थिति के बारे में और जानकारी लेने के लिए शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत से बात करेंगी। अदालत के मामले में सतीश सालियन का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील नीलेश ओझा ने कहा कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के संबंध में CBI की दर्ज FIR में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह और अन्य के नाम शामिल हैं।

सुप्रिया सुले ने कहा कि वह शिवसेना (UBT) नेताओं से बात करेंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं इस घटनाक्रम से हैरान हूं, खासकर इसलिए क्योंकि इसी सरकार ने पहले यह मामला बंद कर दिया था। मुझे ठीक से समझ नहीं आ रहा है कि क्या हो रहा है। मैं स्थिति के बारे में और जानने के लिए संजय राउत साहब से बात करूंगी।’

सुप्रिया सुले बोलीं- इस सरकार में कुछ भी संभव

इस घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश बताए जाने के सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि कुछ भी संभव है। आपको ‘आईसीई’ याद होगा-आयकर विभाग, सीबीआई और ईडी। इन एजेंसियों का इस्तेमाल लोगों के खिलाफ किया गया और फिर उन लोगों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया गया। इसलिए, आजकल सरकार में कुछ भी हो सकता है।

मैं यह सुनकर हैरान थी कि ऐसा (सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज किया जाना) कैसे हुआ, क्योंकि यही सरकार थी जिसने मामले को बंद कर दिया था। मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या हो रहा है। सुप्रिया सुले

वारिस पठान बोले- राजनीतिक रंग न दें

AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और इसका फैसला कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। वारिस पठान ने कहा कि दिशा सालियन मामले को राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोई जरूरत नहीं है। छह साल से एक पिता अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहा है। पहले दिन से ही, अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद, उनका यही कहना रहा है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी हत्या हुई थी।

उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की CBI जांच का आदेश दिया। CBI ने अब उनका बयान दर्ज किया है। उस बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई है। चूंकि मामला अदालत के विचाराधीन है और अभी अदालत में लंबित है, इसलिए मेरा मानना ​​है कि अदालत को ही फैसला करने देना सबसे अच्छा है। वारिस पठान

दिशा सालियान के वकील ने बताया एफआईआर में क्या

वकील ओझा ने कहा कि CBI ने दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन की शिकायत की शुरुआती जांच और जांच एजेंसी द्वारा दर्ज बयान के बाद कल FIR दर्ज की। यह FIR गैंग रेप, मर्डर और इस अपराध को छिपाने की कोशिश के लिए है। यह FIR मुख्य अपराधों के तहत दर्ज की गई है: IPC की धारा 376D, 302, 201, 217, 218 और 120B। FIR में शामिल नामों में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रोहन रॉय, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह, तत्कालीन DCP विशाल ठाकुर, और वो पुलिस अधिकारी जिसने झूठे रिकॉर्ड बनाए, मालवानी पुलिस स्टेशन के PI और SIT के सदस्य शामिल हैं। फिर डॉक्टर संजय यादव… और फिर फोरेंसिक लैब के केमिकल एनालिस्ट जिन्होंने गैंग रेप की रिपोर्ट बदल दी।

ये सभी लोग, और यह एक लंबी लिस्ट है, तो ये सभी लोग इसमें आरोपी हैं… CCTV से पूरी कहानी झूठी साबित हो गई है। तो इस पूरे मामले को छिपाने का मतलब है कि ये सभी सबूत थे। कोर्ट को शुरुआती मामले में दम लगा, इसलिए मामला CBI को सौंप दिया। नीलेश ओझा, दिशा सालियान के वकील

8 जून 2020 को हुई थी दिशा सालियान की संदिग्ध मौत

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद दिशा सालियन की मौत के मामले में FIR दर्ज की। कोर्ट ने मामले की गहन जांच का आदेश दिया था। सालियन 8 जून, 2020 को मृत पाई गई थीं, जो मुंबई के बांद्रा में राजपूत के घर पर उनके मृत पाए जाने से कुछ दिन पहले की घटना थी।

मैंने जो सच था, वही बताया। मैंने उन्हें अपनी बेटी के साथ हुई हर घटना के बारे में बताया। मैंने सभी नाम बताए: आदित्य, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और बॉडीगार्ड्स। उन्होंने सब कुछ नोट कर लिया। उन्होंने कहा कि मेरी बताई बातों के आधार पर वे कार्रवाई करेंगे। कुछ दिनों में कार्यवाही शुरू हो जाएगी।
सतीश सालियन, दिशा सालियान के पिता

उनकी मौत को पहले ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट’ (ADR) के तौर पर दर्ज किया गया था। यह घटनाक्रम बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा CBI को FIR दर्ज करने और सालियन की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करने का निर्देश देने के बाद हुआ है। इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की डिवीज़न बेंच ने इस बात पर चिंता जताई थी कि सालियन के परिवार के मर्डर के आरोपों के बावजूद सिर्फ ADR दर्ज किया गया था। कोर्ट ने यह भी गौर किया था कि मौत के पांच साल बाद भी सालियन के परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ADR की कॉपी नहीं दी गई थी।

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