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24 साल से बना रहे थे नकली सिक्के, अब तक 70 करोड़ खपाएं… सप्लाई का सिस्टम दंग कर देगा

उत्तरप्रदेश के सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले इंटरस्टेट गैंग का भंडाफोड़ कर मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक गैंग 2001 से यह धंधा कर रहा था और रोज करीब 12 हजार नकली सिक्के तैयार करता था.

सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक बड़े इंटरस्टेट गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गैंग के मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह करीब 24 साल से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय था और अब तक 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपाने का अनुमान है. हालांकि पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अभी तक कोई सटीक रकम नहीं बताई है और जांच के बाद वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा.

रोज तैयार करते थे 12 हजार नकली सिक्के

पुलिस के मुताबिक गैंग का मुख्य सरगना मोहाली, पंजाब निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है. वह वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के काम में शामिल बताया जा रहा है. सहारनपुर पुलिस ने कोतवाली नगर, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में उसे चार अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया.

गैंग ने सिक्के बनाने के लिए पूरा इंडस्ट्रियल सेटअप तैयार कर रखा था. पुलिस के मुताबिक आरोपी रोजाना करीब 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करते थे. मौके से छह मशीनें, कई तरह की डाई, पॉलिश करने की मशीन, ओवन और सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले तमाम औजार बरामद हुए हैं.

ऐसे होता था नकली सिक्कों का खेल

पुलिस के मुताबिक गैंग पहले सिक्कों को तैयार करने के लिए मशीन और डाई का इस्तेमाल करता था. इसके बाद उनकी पॉलिश और फिनिशिंग की जाती थी, ताकि वे देखने में असली सिक्कों जैसे लगें. पुलिस ने मौके से 39 बिना मोहर की डाई और 20 मोहर लगी डाई बरामद की हैं. इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के भी मिले हैं.

पुलिस का कहना है कि नकली सिक्कों को बाजार में खपाने के लिए छोटे व्यापारियों, शराब के ठेकों और टोल टैक्स जैसी जगहों को निशाना बनाया जाता था. इस तरह बड़ी संख्या में सिक्कों को धीरे-धीरे बाजार में चलाया जाता था, जिससे सीधे तौर पर बड़े स्तर पर शक न हो.

सहारनपुर में नया बेस बनाने की थी तैयारी

पुलिस के मुताबिक आरोपी सहारनपुर में अपना नया बेस तैयार करने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस को इनके बारे में जानकारी मिली और संयुक्त टीम ने आरोपियों को इंटरसेप्ट कर गिरफ्तार कर लिया. उनके कब्जे से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के बरामद हुए, जिनकी कुल कीमत 1.28 लाख रुपये है. इसके अलावा 10 हजार रुपये के असली नोट, आठ मोबाइल फोन और दो कारें भी बरामद की गई हैं.

पुलिस ने सात हिसाब-किताब रजिस्टर भी बरामद किए हैं. अब इन रजिस्टरों और आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि गैंग ने किन-किन राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था और नकली सिक्कों की सप्लाई कहां-कहां तक होती थी.

दिल्ली पुलिस भी कर चुकी है गिरफ्तारी

एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक गैंग का मास्टरमाइंड उपकार लूथरा पहले दिल्ली पुलिस के हत्थे भी चढ़ चुका है. एक समय उसके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था. पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और संपर्कों को खंगाल रही है.

जांच में आठ सदस्यों वाले गैंग की जानकारी सामने आई है, जिनमें पांच की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है. साथ ही आरोपियों की अवैध संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी है.

असली और नकली सिक्के में मामूली अंतर

एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि आरोपियों द्वारा बनाए गए सिक्के काफी हद तक असली सिक्कों से मेल खाते हैं. यही वजह है कि आम लोगों के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है. पुलिस के मुताबिक अभी तक जांच में इस गैंग का पीएनबी चेस्ट कैश से कोई लिंक सामने नहीं आया है.

फिलहाल पुलिस आरोपियों के नेटवर्क और पुराने संपर्कों की जांच कर रही है. अगर जांच में किसी अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि होती है तो उस दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने व्यापारियों और वित्तीय संस्थानों से अपील की है कि संदिग्ध सिक्के मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें.

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