गुजरात में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, महंगाई ने आम जनता पर फिर से भारी मार डाली है। एक तरफ गैस और फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से गृहणियों और आम वर्ग का बजट बिगड़ गया है, वहीं दूसरी तरफ रोजी-रोटी के लिए जूझ रहे रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अहमदाबाद में चक्काजाम: रिक्शा-टैक्सी ड्राइवरों की 4 दिन की हड़ताल
अहमदाबाद शहर के रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने फ्यूल की बढ़ती कीमतों और किराए में बढ़ोतरी समेत बाकी मांगों को लेकर 4 दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। रिक्शा चालकों की यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन और सरकार ने उनकी जायज मांगों को तुरंत पूरा नहीं किया तो यह आंदोलन सिर्फ अहमदाबाद तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे गुजरात में राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगा। इस 4 दिन की हड़ताल से यात्रियों, कर्मचारियों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। गुजरात गैस का बड़ा झटका: PNG की कीमत में ₹6.53 की भारी बढ़ोतरी
गुजरात गैस ने महंगाई के असहनीय बोझ तले दबी जनता को बड़ा झटका दिया है। गुजरात गैस ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमत में ₹6.53 प्रति SCM की भारी बढ़ोतरी कर दी है। गैस की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से आम और मिडिल क्लास के किचन का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। जनता अभी इस झटके से उबरी नहीं है, और पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें भी फिर से बढ़ेंगी।
सरकार की नीतियों पर सवाल: कॉर्पोरेट्स के लिए रेड कार्पेट और किसानों और जनता के लिए प्राइस टैग?
सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ अब जनता और किसानों में बहुत गुस्सा है। एक तरफ फसल बीमा या देश की सिंचाई और फसल नुकसान के मुआवजे के नाम पर मामूली रकम देकर किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों और उद्योगपतियों के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है। आम टैक्सपेयर के पैसे और मेहनत की कमाई पर इस तरह महंगाई की मार डालकर सरकार आखिर क्या साबित करना चाहती है? जनता अब सरकार के विकास के दावों के खिलाफ विरोध की आवाज उठा रही है और हर महंगाई वाले प्राइस टैग का सही हिसाब मांग रही है।

