देश की राजनीति में इन दिनों विकास के दावों और प्राथमिकताओं को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र व राज्य की बीजेपी सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए एक बेहद गंभीर और ज्वलंत मुद्दा उठाया है। कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ देश में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा का ढांचा चरमरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी अपने नए और भव्य दफ्तरों के निर्माण में पूरी ताकत झोंक रही है।
96,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद होने का आरोप: शिक्षा और स्वास्थ्य की उपेक्षा का दावा
कांग्रेस ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की नीतियों पर कड़े प्रहार किए हैं:
बंद होते सरकारी स्कूल: कांग्रेस का दावा है कि देश भर में 96,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज कर दिया गया है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
अस्पताल और रोजगार नदारद: देश का युवा आज रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है और आम नागरिक महंगाई तथा चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं से त्रस्त है।
बीजेपी के भव्य दफ्तरों का रिपोर्ट कार्ड: “अपना साथ, अपना विकास!”
विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के विस्तार पर तंज कसते हुए कहा कि जिस गति से पार्टी के कार्यालय बन रहे हैं, अगर उसी गति से स्कूल और अस्पताल बनाए गए होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती। कांग्रेस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार:
290 दफ्तर: बीजेपी के नए और आधुनिक 290 दफ्तर बनकर तैयार हो चुके हैं।
105 निर्माणाधीन दफ्तर: देश भर में 105 से अधिक नए दफ्तरों का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
123 दफ्तरों के लिए जमीन अधिग्रहीत: 123 अन्य स्थानों पर नए कार्यालय बनाने के लिए जमीनों की खरीद प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
महंगाई और बेरोजगारी से जनता बेहाल: “जनता मांग रही है हिसाब!”
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि सरकार जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने और उन्हें गुमराह करने का काम कर रही है। एक तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालयों और बीजेपी के हाइटेक दफ्तरों का निर्माण जोरों पर है, वहीं दूसरी तरफ देश की आम जनता रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, रसोई गैस और राशन के बढ़ते दामों तथा बढ़ती बेरोजगारी की मार झेल रही है।
राजनीतिक गलियारों में छिड़ी इस जंग के बाद अब देश की जनता यह सवाल पूछ रही है कि आखिर सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए – जनता के लिए स्कूल-अस्पताल या पार्टी के लिए आलीशान दफ्तर?

