ऑपरेशन कायाकल्प अब बुनियादी सुविधाओं में बड़े बदलाव का जरिया बन रहा है. स्कूलों में भवन, शौचालय, पेयजल, बिजली, फर्नीचर और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित सीखने का माहौल मिल सके.
2018 से ऑपरेशन कायाकल्प, उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को एक तय 19-बिंदु मानक के तहत अपग्रेड कर रहा है, और नीति आयोग ने इसे एक मॉडल पहल के तौर पर सराहा है.
लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के कई सरकारी प्राइमरी और अपर-प्राइमरी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी. शौचालय, पीने का पानी, चारदीवारी, ठीक बैठने की व्यवस्था, यहां तक कि बिजली भी नहीं थी.
2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी स्थिति को बदलने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया, जिसका मकसद था इन स्कूलों को एक तय मानक के हिसाब से व्यवस्थित तरीके से अपग्रेड करना.
ऑपरेशन कायाकल्प में क्या शामिल है?
क्लासरूम, चारदीवारी और गेट
पीने का पानी और लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय
बिजली कनेक्शन और लाइटिंग
फर्नीचर और स्मार्ट/डिजिटल क्लासरूम
खेल का मैदान, पुस्तकालय और हैंडवॉश स्टेशन
अब तक की प्रगति
सितंबर 2025 तक राज्य सरकार के मुताबिक, कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में 97% बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा चुकी थीं
इससे पहले विधानसभा में दिसंबर 2025 के एक अपडेट के मुताबिक, फर्नीचर की उपलब्धता खासतौर पर 65% थी, और उस साल के लिए 100% का लक्ष्य तय किया गया था
राज्य के परिषदीय स्कूलों में फिलहाल करीब 1.66 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं
2024-25 के राज्य बजट में ऑपरेशन कायाकल्प के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे
पारदर्शिता के लिए, हर स्कूल के अपग्रेडेशन काम की जियो-टैगिंग की जाती है, और प्रेरणा पोर्टल के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग होती है.
सिर्फ प्राइमरी स्कूलों तक सीमित नहीं: प्रोजेक्ट अलंकार
एक समानांतर पहल, प्रोजेक्ट अलंकार, इसी तरह के अपग्रेड सेकेंडरी स्कूलों तक भी ले जाती है, इसके तहत 2,295 स्कूलों को 27 मानकों पर मैप किया गया है, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, वाई-फाई, लैबोरेटरीज और आधुनिक फर्नीचर के साथ-साथ CCTV, फायर सेफ्टी उपकरण और बायोमेट्रिक अटेंडेंस जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं.
मान्यता और पैमाना
नीति आयोग ने ऑपरेशन कायाकल्प को एक मॉडल पहल बताया है, जिसे देश के बाकी हिस्सों में भी दोहराया जा सकता है. अगस्त 2025 से, कम नामांकन वाले स्कूलों (50 से कम छात्र) को पास के बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि छात्रों को बेहतर सुविधाओं तक पहुंच बनी रहे, जबकि सरकार कम नामांकन वाले परिसरों का पुनर्मूल्यांकन करती रहे.

