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चित्रकूट में जिंदगियां बचाने की जिद, कौन हैं IAS पुलकित गर्ग? मंदाकिनी के उफान में भी संभाला मोर्चा

भीषण बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। चित्रकूट की मंदाकिनी नदी कहर बरपा रही है। डीएम पुलकित गर्ग लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हुए हैं।

चित्रकूट: धर्मनगरी चित्रकूट में जब मंदाकिनी नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया, तो तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया जलस्तर के अचानक बढ़ने से कई गांव और मोहल्ले जलमग्न हो गए। लोग बेघर होकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटकने लगे।इस आपदा और तबाही के माहौल में चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग आम जनता के लिए किसी देवदूत और ईश्वर के स्वरूप की तरह सामने आए। संकट के समय में उनकी अभूतपूर्व सक्रियता ने न केवल सैकड़ों जिंदगियों को सुरक्षित निकाला, बल्कि प्रशासनिक तत्परता और इंसानियत का एक अनुपम उदाहरण भी पेश किया।

बाढ़ की गंभीर स्थिति की खबर मिलते ही डीएम पुलकित गर्ग ने बिना कोई समय गंवाए सीधे ग्राउंड ज़ीरो पर उतरने का फैसला किया। प्रोटोकॉल, पद और गाड़ियों का काफिला पीछे छोड़कर वे आपदा ग्रस्त इलाकों में निकल पड़े। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने न गंदा पानी देखा और न ही कंटीला मलबा। नंगे पैर, घुटनों तक भरे पानी में दौड़-दौड़कर वे पीड़ितों का हाल-चाल लेते और राहत सामग्री बांटते नजर आए।

डीएम की इस निडरता और संवेदनशीलता को देखकर स्थानीय लोग भावुक हो उठे। जहां जलभराव के कारण रेस्क्यू टीमों को पहुंचने में परेशानी हो रही थी, वहां डीएम खुद नावों पर सवार होकर या पैदल ही पानी को चीरते हुए उन बुजुर्गों, महिलाओं और मासूम बच्चों तक पहुंचे, जो अपने छतों और घरों में फंसे हुए थे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर पीड़ित को सुरक्षित राहत शिविरों तक पहुंचाया जाए और उन्हें भोजन, पीने का पानी व जरूरी दवाएं तुरंत मुहैया कराई जाएं।

चित्रकूट के लोगों के मुंह पर आज केवल एक ही नाम है- पुलकित गर्ग। सोशल मीडिया पर भी उनकी कार्यशैली की जबरदस्त वाहवाही हो रही है। कोई उन्हें प्रशासन का असली चेहरा कह रहा है, तो कोई उन्हें चित्रकूट का रक्षक बता रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनकी नंगे पैर दौड़ते हुए तस्वीरों को शेयर कर लोग उनकी कर्तव्यनिष्ठा को सलाम कर रहे हैं। प्रशासन जब संवेदनशीलता और निस्वार्थ सेवाभाव के साथ धरातल पर उतरता है, तो जनता का विश्वास कई गुना बढ़ जाता है।

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