सोशल मीडिया के ज़माने में हर दिन नए और चौंकाने वाले मामले सामने आते हैं, लेकिन हाल ही में वायरल हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नेटिज़न्स और समाज में खूब चर्चा और गुस्सा फैलाया है। एक महिला के दो विवादित तलाक और बदले में मिली मोटी रकम के आंकड़े देखकर लोग हैरान हैं। सिर्फ़ 4 साल की छोटी शादी में करोड़ों रुपये का रिटर्न पाने वाली इस महिला के मामले को लोग सोशल मीडिया पर मज़ाक में “स्मार्ट इन्वेस्टमेंट” कह रहे हैं।
पहले पति से 20 लाख और दूसरे अमीर पति से 15 करोड़ ‘जैकपॉट’
वायरल पोस्ट में किए गए दावे के मुताबिक, इस महिला ने अपनी पहली शादी खत्म करते समय अपने पहले पति से एलिमनी (तलाक का मुआवज़ा) के तौर पर ₹20 लाख लिए थे। उसके बाद, महिला ने एक बहुत अमीर आदमी से दूसरी शादी कर ली। हालांकि, यह दूसरी शादी भी ज़्यादा दिन नहीं चली और जल्द ही तलाक की नौबत आ गई। लेकिन इस बार, दूसरे पति के साथ मेंटेनेंस और सेटलमेंट के तौर पर महिला को कुल ₹15 करोड़ कैश, एक शानदार फ्लैट और एक महंगी कार मिली!
लोगों का कटाक्ष: “शादी या बिजनेस मॉडल?”
सिर्फ 4 साल की शादी के छोटे से समय में कुल ₹15 करोड़ से ज़्यादा कमाने के इस मामले ने इंटरनेट पर विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया यूज़र्स इस पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं:
स्मार्ट इन्वेस्टमेंट या कानूनी लूट? लोग कटाक्ष करते हुए लिख रहे हैं कि स्टॉक मार्केट या रियल एस्टेट में भी 4 साल में इतना बड़ा रिटर्न नहीं मिलता जितना इस ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट’ में मिलता है!
शादी जैसे इंस्टीट्यूशन के पतन पर सवाल: कई नेटिज़न्स ने चिंता जताई है कि शादी जैसे रिश्ते, जिन्हें पवित्र माना जाता है, अब कुछ लोगों के लिए पैसा कमाने और आसानी से करोड़पति बनने का ‘बिजनेस मॉडल’ बन गए हैं।
कानून के गलत इस्तेमाल पर चर्चा: पुरुषों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन और यूज़र्स दावा कर रहे हैं कि तलाक और मेंटेनेंस कानूनों का ऐसा गलत इस्तेमाल बेगुनाह और अमीर पुरुषों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर रहा है। गुजरात का एक पक्का सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह स्क्रिप्ट और कहानी भले ही लोगों के लिए चर्चा या मनोरंजन का विषय बन गई हो, लेकिन यह समाज पर एक गंभीर सवालिया निशान खड़ा करती है। क्या शादी अब सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट और पैसे कमाने का ज़रिया बनती जा रही है? कानूनी सुधारों और बैलेंस के बिना, इसमें कोई शक नहीं कि ऐसे मामले भविष्य में शादी जैसी संस्था पर युवा पीढ़ी का भरोसा खत्म कर देंगे।

