5 साल की मासूम से रेप से लेकर फर्जी शादी के नाम पर शोषण तक सामने आईं 3 शर्मनाक घटनाएं, सूरत के बड़ा ‘क्राइम जोन’ बनने पर उठे सवाल
सूरत: सूरत, जो एक ‘सुरक्षित शहर’ और आर्थिक राजधानी माना जाता है और गृह मंत्री हर्ष सांघवी का गृह नगर है, में अब महिलाओं और मासूम लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर और ज्वलंत सवाल खड़े हो गए हैं। जिस तरह सूरत शहर असामाजिक तत्वों और विक्षिप्त मानसिकता वाले अपराधियों के लिए खुला मैदान बनता जा रहा है, उसी तरह एक ही दिन में लिंबायत, कतारगाम और अमरोली इलाके में 3 शर्मनाक घटनाओं ने पूरे गुजरात को हिलाकर रख दिया है।
- लिंबायत: 5 साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म का प्रयास
लिंबायत इलाके में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जहां खेल रहे 5 साल के बच्चे के साथ नराधम ने दुष्कर्म करने की कोशिश की. मासूम बच्ची की चीख और परिवार की सतर्कता से अपराधी पकड़ा गया.
- कतारगाम: दोस्ती के नाम पर नाबालिग से रेप
कतारगाम इलाके में सोशल मीडिया या परिचित के नाम पर नाबालिग को प्रेम जाल में फंसाया और उसकी मजबूरी और अज्ञानता का फायदा उठाया। कानून से अंजान मासूम बेटी के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस अपराधी ने दोस्ती के पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर दिया है.
- अमरोली: फर्जी शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण
अमरोली पुलिस स्टेशन की सीमा में एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक लड़की को उसकी शादी का दिखावा दिखाकर, नकली शादी का नाटक करके लगातार शारीरिक शोषण किया गया। पितृसत्तात्मक और विकृत मानसिकता वाले पुरुषों ने लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी थी.
एक्शन मोड में पुलिस, लेकिन सवाल बरकरार!
सूरत पुलिस ने तीनों गंभीर घटनाओं में कड़ी धाराओं, POCSO और दुष्कर्म के तहत मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि कानून का डर कहां गायब हो गया है?
गृह मंत्री के अपने शहर में अपराधी इतने क्रूर क्यों हो रहे हैं?
हमारी बेटियां गली, मोहल्ले और डिजिटल स्पेस में कब और कैसे सुरक्षित रहेंगी?
क्या घटना के बाद पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर लेना ही काफी है या फिर ऐसे राक्षसों के खिलाफ कोई अनुकरणीय एवं त्वरित सजा की व्यवस्था होगी?
महानगर मेट्रो न्यूज़ आइडिया:
एक समाज के रूप में हम कहाँ जा रहे हैं? जब 5 साल की बच्ची भी सुरक्षित नहीं है तो यह न सिर्फ कानून व्यवस्था की विफलता है बल्कि सामाजिक नपुंसकता की निशानी है. दुष्ट मानसिकता वाले अपराधियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि सिर्फ सूरत ही नहीं, बल्कि पूरा गुजरात एक लड़की को बुरी नजर से देखने से कांप उठे।

