टेलीग्राम और सोशल मीडिया पर खुलेआम पति-पत्नी की अभद्र भाषा का खेल, ‘ब्रॉडमाइंडेड’ शब्द की आड़ में सामाजिक मूल्यों को तार-तार किया जा रहा है
अहमदाबाद : आज के मॉडर्न ज़माने में सोशल मीडिया और डिजिटल टेक्नोलॉजी जितनी काम की साबित हो रही है, उतनी ही इसका बहुत ही काला और हवस भरा चेहरा भी सामने आ रहा है। भारतीय संस्कृति में शादी सिर्फ़ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं बल्कि सात जन्मों का पवित्र रिश्ता है। लेकिन आज के ‘हाई-फाई’ समाज कल्चर और ऑनलाइन सीक्रेट ग्रुप्स की आड़ में एक ऐसा गलत खेल खेला जा रहा है जिसने नैतिक पतन की सारी हदें पार कर दी हैं।
ऑनलाइन ग्रुप्स की ब्लैक मार्केट: ‘ब्रॉडमाइंडेड’ शब्द के पीछे हवस का जाल
सोशल मीडिया और खासकर टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर “वाइफ स्वैपिंग इंडिया”, “वाइफ स्वैपिंग गुजरात”, “कपल्स स्वैपिंग क्लब” और “रियल मीट गुजरात” जैसे नामों वाले पब्लिक और प्राइवेट ग्रुप्स खूब फल-फूल रहे हैं। शाइनी वर्डप्ले: एडवर्टाइजमेंट में “बहुत खुले विचारों वाला कपल”, “कोई सोशल कॉम्प्लिकेशन नहीं” और “ओपन रिलेशनशिप” जैसे गुमराह करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
बोली लगाना और खरीदना-बेचना: इन सीक्रेट ग्रुप्स में, लोग अपने जीवनसाथी की फोटो और डिटेल्स शेयर करके दूसरे कपल्स से ‘वाइफ स्वैपिंग’ के लिए बातचीत करते हैं।
डिजिटल ब्लैक बिजनेस: ऑनलाइन मीडिया अब खराब सोच वाले लोगों के लिए एक अड्डा बन गया है, जहां भरोसे और सीमाओं की खुलेआम नीलामी होती है।
नकाबपोश प्राइवेट क्लब: स्टेटस के नाम पर अंधेरे कोनों का खेल
ऐसे प्राइवेट क्लब बड़े शहरों के पॉश इलाकों, फार्महाउस और सीक्रेट रिसॉर्ट्स में चलाए जाते हैं। जहां लोग चेहरे पर ‘नकाब’ पहनकर इकट्ठा होते हैं और अंधेरे कमरों में अपने पार्टनर बदलते हैं। यह अब पैसे, प्रॉपर्टी और स्टेटस के अहंकार में अंधे एक खास वर्ग के लिए ‘लाइफस्टाइल’ या ‘शौक’ बनता जा रहा है।
मंजूरी सिर्फ एक भ्रम है: दबाव, शारीरिक शोषण और ब्लैकमेल
इस ब्लैक बिजनेस का सबसे दर्दनाक पहलू महिलाओं का शोषण है।
- पत्नियों पर बहुत ज़्यादा दबाव: मतलबी सोच वाले पति अपनी पत्नियों को मेंटली और फिजिकली ऐसी गलत आदतों में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं।
- ब्लैकमेल और नशा: जो औरतें मना करती हैं, उन्हें नशा देकर या प्राइवेट वीडियो-फोटो से ब्लैकमेल करके इस गंदगी में धकेल दिया जाता है।
- शादी सिर्फ़ दिखावा है: लोग समाज में शादीशुदा होने का दिखावा करते हैं और बाद में अपनी पत्नियों का अपने ही दोस्तों या अनजान लोगों से शोषण करवाते हैं।
खुली शादी नहीं, बल्कि समाज की बर्बादी का रास्ता!
जो बात शुरू में मज़ाक, फैशन या शर्म के तौर पर शुरू होती है, वह धीरे-धीरे दिमाग में एक मेंटल बीमारी और ज़हर की तरह जड़ें जमा लेती है। जब ऑनलाइन ग्रुप्स में खुलेआम कल्चर, लिमिट और पवित्रता का व्यापार होने लगता है, तो समझ लीजिए कि समाज को एक भयानक बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है।
महानगर मेट्रो न्यूज़ विचार:
क्या आप अपने जीवनसाथी को किसी और को सौंपने की इस गलत आदत को ‘मॉडर्न सोच’ या ‘बड़ी सोच’ मानते हैं या यह कलियुग और नैतिक पतन का चरम है? साइबर क्राइम और पुलिस सिस्टम के लिए अब समय आ गया है कि वे ऐसे ब्लैक ऑनलाइन नेटवर्क पर डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक करें।

