जांच में गुणवत्ता मानकों की खुली पोल, 5 प्रतिशत होना चाहिए था जरूरी घटक, लेकिन नमूनों में शून्य से 4.4 प्रतिशत तक ही मिला; लेबलिंग में भी खामियां
नई दिल्ली। भारत में करोड़ों लोगों की रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसाला उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। मसाला क्षेत्र की चर्चित कंपनी ‘एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स’ की मिश्रित हींग पाउडर की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। FSSAI की प्रयोगशाला जांच में एवरेस्ट की हींग के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
सरकारी मानकों के अनुसार हींग में कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल-सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट होना जरूरी है। लेकिन जांच के दौरान एवरेस्ट के नमूनों में यह मात्रा शून्य से लेकर 3.29 प्रतिशत और अधिकतम 4.4 प्रतिशत तक ही पाई गई। इसके अलावा उत्पाद की लेबलिंग में भी खामियां सामने आने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली जानकारी होने की बात कही गई है।
‘लालजी गोधू’ की हींग पर भी कार्रवाई
इसी सख्त जांच अभियान के तहत FSSAI ने एक अन्य चर्चित ब्रांड ‘लालजी गोधू’ की हींग को लेकर भी गुणवत्ता में कमी और मिलावट से संबंधित कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर हुई इस कार्रवाई के बाद खाद्य बाजार में हलचल बढ़ गई है।
सवाल: सिर्फ हींग पर कार्रवाई क्यों? वेफर-बिस्किट बनाने वाली बड़ी कंपनियों पर कब होगी कार्रवाई?*
हींग के उत्पादों पर कार्रवाई के बाद अब नागरिकों और उपभोक्ता संगठनों की ओर से खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर व्यापक सवाल उठाए जा रहे हैं।
बाजार में बच्चों द्वारा खाए जाने वाले वेफर, बिस्किट, नाश्ते और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ बड़े खाद्य निर्माता घटिया गुणवत्ता वाले आटे, रसायनयुक्त पाम ऑयल और अत्यधिक परिरक्षकों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में बड़ी कंपनियों और प्रभावशाली खाद्य निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई कब होगी, यह सवाल उठाया जा रहा है।
प्रतिबंधित प्लास्टिक पैकेजिंग के इस्तेमाल पर भी सवाल
खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कई खाद्य ब्रांड अपने उत्पादों की पैकिंग में कानून द्वारा प्रतिबंधित या स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे प्लास्टिक के उपयोग पर खाद्य एवं संबंधित नियामक एजेंसियां कब सख्त कदम उठाएंगी, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सिर्फ जुर्माना नहीं, कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग
खाद्य सुरक्षा को लेकर उठ रही आवाजों में यह मांग भी सामने आ रही है कि केवल एक-दो उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने या मामूली जुर्माना लगाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी कंपनी या निर्माता द्वारा जानबूझकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
लोगों की मांग है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले छोटे-बड़े सभी निर्माताओं पर समान रूप से सख्त कार्रवाई हो और जनस्वास्थ्य से समझौता करने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कदम उठाए जाएं।
हालांकि, एवरेस्ट और लालजी गोधू से संबंधित कार्रवाई के बारे में अंतिम कानूनी स्थिति, संबंधित आदेशों और कंपनियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

