कानून के उल्लंघन और कथित तौर पर अत्यधिक ब्याज वसूलने के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, लाइसेंस रद्द होने के बाद याजखोरी के कारोबार में मचा हड़कंप
गुजरात। राज्य में अवैध याजखोरी और साहूकारों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। नियमों का उल्लंघन कर कथित तौर पर जरूरतमंद लोगों से अत्यधिक ब्याज वसूलने के मामले में भाजपा नेता राजू करपड़ा समेत कुल 79 साहूकारों के धन उधार देने के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।
इसके साथ ही इन सभी पर अगले 3 वर्षों तक नया लाइसेंस हासिल करने और धन उधार देने पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद साहूकारी और याजखोरी के कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
आखिर कितना ब्याज वसूला गया कि लाइसेंस ही रद्द हो गए?
कार्रवाई सामने आने के बाद आम लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इन साहूकारों द्वारा कितना अत्यधिक ब्याज वसूला गया होगा कि प्रशासन को लाइसेंस रद्द करने जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा।
आरोप है कि निर्धारित ब्याज दरों से अधिक रकम वसूलकर गरीब, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा था। जरूरत के समय पैसा लेने वाले लोगों से कथित तौर पर भारी ब्याज वसूले जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं।
ऐसे में भाजपा नेता राजू करपड़ा का नाम भी 79 साहूकारों की सूची में सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।
याजखोरी के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
साहूकारों के कथित चंगुल में फंसकर कई जरूरतमंद परिवार आर्थिक संकट का सामना करते हैं। अत्यधिक ब्याज और कर्ज के दबाव के कारण लोगों के सामने गंभीर परिस्थितियां पैदा होने के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
ऐसे में धन उधार देने के कारोबार में नियमों का पालन सुनिश्चित करने और अवैध ब्याज वसूली पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रशासन की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
79 साहूकारों के लाइसेंस रद्द होने के बाद* अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि आगे इनके खिलाफ केवल प्रशासनिक कार्रवाई होगी या अवैध ब्याज वसूली से जुड़े मामलों में आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
क्या सिर्फ लाइसेंस रद्द होने से पीड़ितों को मिलेगा न्याय?
कार्रवाई के बाद अब पीड़ित लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों से कथित तौर पर निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूला गया, क्या उन्हें उनकी अतिरिक्त रकम वापस दिलाई जाएगी?
साथ ही यह भी देखना होगा कि लाइसेंस रद्द होने के बाद कहीं ये साहूकार किसी दूसरे माध्यम से दोबारा अवैध रूप से धन उधार देने और अत्यधिक ब्याज वसूलने का काम तो शुरू नहीं करते।
कार्रवाई के बाद उठ रहे कई सवाल
सवाल 1:* क्या केवल लाइसेंस रद्द करने से इन 79 साहूकारों द्वारा कथित अवैध ब्याज वसूली पूरी तरह बंद हो जाएगी?
सवाल 2:* जिन गरीब और जरूरतमंद लोगों से कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज वसूला गया है, क्या उनकी रकम वापस दिलाने की कोई व्यवस्था की जाएगी?
सवाल 3:* नियमों का उल्लंघन करने वाले साहूकारों के खिलाफ आगे कितनी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
प्रशासन की इस कार्रवाई से फिलहाल याजखोरी के कारोबार से जुड़े लोगों में सन्नाटा जरूर पसरा है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि 79 लाइसेंस रद्द करने के बाद प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और कथित पीड़ितों को वास्तविक राहत कब मिलती है।

