सरकारी विज्ञापनों पर खर्च को लेकर वाघेला ने उठाए सवाल, महंगाई, बेरोजगारी और बदहाल सड़कों का मुद्दा उठाते हुए खर्च की प्राथमिकताएं बदलने की मांग
अहमदाबाद। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शंकरसिंह वाघेला (बापू) ने राज्य सरकार की प्रचार नीति और सरकारी धन के खर्च को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुबह अखबार खोलते ही सरकारी विज्ञापनों की भरमार दिखाई देती है। उनका आरोप है कि सरकार अपनी छोटी-बड़ी उपलब्धियों के प्रचार के लिए जनता के टैक्स से जुटाए गए करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च कर रही है।
शंकरसिंह वाघेला ने कहा कि यदि प्रचार पर खर्च की जा रही इतनी बड़ी राशि को जनता के बुनियादी विकास कार्यों में लगाया जाए तो राज्य की कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
आत्मप्रशंसा के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल’
वाघेला ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों का प्रचार और आत्मप्रशंसा करने के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये होर्डिंग, टेलीविजन और अखबारों के विज्ञापनों पर खर्च कर रही है। उनके मुताबिक, दूसरी ओर राज्य की जनता महंगाई, बेरोजगारी और खराब सड़कों जैसी समस्याओं से परेशान है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, तो सरकारी प्रचार पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या है?
अस्पताल, स्कूल और गांवों की समस्याओं पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के सामने प्राथमिक सुविधाओं को लेकर भी कई सवाल रखे। उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी है, स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता है और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें जर्जर हैं, तो ऐसे समय में करोड़ों रुपये प्रचार पर खर्च करने के बजाय इन समस्याओं को दूर करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकारी प्रचार पर होने वाले खर्च की एक सीमा निर्धारित की जाए और बचाई गई राशि को स्वास्थ्य, शिक्षा तथा ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में लगाया जाए।
बयान के बाद गुजरात की राजनीति में बढ़ी हलचल
शंकरसिंह वाघेला के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने सरकार से अपील की कि विकास को केवल सरकारी विज्ञापनों और प्रचार सामग्री में दिखाने के बजाय जमीन पर किए गए काम के जरिए जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
वाघेला के अनुसार, यदि सरकारी प्रचार पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम किया जाए तो उस राशि का इस्तेमाल राज्य के युवाओं, किसानों और आम नागरिकों के लिए सीधे विकास एवं कल्याणकारी कार्यों में किया जा सकता है। अब उनके इस बयान पर राज्य सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

