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गुजरात पुलिस के इतिहास का काला अध्याय: रक्षक पर ही लगा भक्षक बनने का आरोप! स्वीटी पटेल हत्याकांड की खौफनाक पूरी कहानी

पुलिस निरीक्षक अजय देसाई पर स्वीटी पटेल की हत्या का आरोप, शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश; फोरेंसिक जांच में मिले अवशेषों ने खोला राज

अहमदाबाद/वडोदरा। गुजरात में वर्ष 2021 में सामने आया स्वीटी पटेल हत्याकांड राज्य के सबसे चर्चित और सनसनीखेज मामलों में से एक रहा। इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिस निरीक्षक अजय देसाई पर ही स्वीटी पटेल की हत्या का आरोप लगा। पुलिस अधिकारी पर हत्या जैसे गंभीर आरोप सामने आने के बाद पूरे गुजरात में इस मामले को लेकर खलबली मच गई थी।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ शव को ठिकाने लगाने, सबूत नष्ट करने और वैज्ञानिक जांच के जरिए मृतका की पहचान करने जैसी कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

रिश्ते से शुरू हुई कहानी में आया खतरनाक मोड़

मिली जानकारी के अनुसार, वडोदरा जिले के करजण पुलिस थाने में पुलिस निरीक्षक के पद पर तैनात अजय देसाई और करजण इलाके में रहने वाली स्वीटी पटेल के बीच करीबी संबंध थे। दोनों के लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में होने की बात जांच के दौरान सामने आई थी।

बाद में अजय देसाई ने दूसरी युवती से विवाह कर लिया। इसके बाद स्वीटी पटेल और अजय देसाई के बीच संबंधों को लेकर विवाद और तनाव बढ़ने लगा। जांच के अनुसार, दोनों के बीच कई बार कहासुनी और विवाद हुआ था।

इसी बीच स्वीटी पटेल की हत्या किए जाने का आरोप अजय देसाई पर लगा।

जून 2021 में अचानक गायब हुई स्वीटी पटेल

जून 2021 के पहले सप्ताह में स्वीटी पटेल अचानक लापता हो गई थी। शुरुआत में उसके परिवार को बताया गया कि वह बिना किसी को बताए घर से चली गई है।

लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब स्वीटी का कोई पता नहीं चला तो परिवार की चिंता बढ़ती गई। परिवार ने स्थानीय स्तर पर चल रही जांच पर असंतोष जताते हुए उच्च अधिकारियों से मामले की जांच की मांग की।

इसके बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ा और पुलिस अधिकारी की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई।

शव छिपाकर सबूत मिटाने की कोशिश का आरोप

जांच में सामने आया कि स्वीटी पटेल की कथित हत्या के बाद उसके शव को एक निजी वाहन में ले जाया गया था।

इसके बाद आंतरिक जांच में आरोप सामने आया कि आणंद जिले के अटाली गांव के पास एक बंद होटल के पीछे सुनसान स्थान पर शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।

जांच के अनुसार, शव को जलाने के लिए लकड़ी, पेट्रोल और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। शव बुरी तरह जल जाने के कारण पहचान से जुड़े सामान्य सबूत नष्ट हो गए थे।

लेकिन जांच अधिकारियों ने घटनास्थल की बारीकी से जांच जारी रखी।

सीआईडी अपराध शाखा और एटीएस की जांच से आया बड़ा मोड़

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआईडी अपराध शाखा और गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस तक पहुंची। अनुभवी अधिकारियों की टीम ने तकनीकी निगरानी, गुप्त सूचनाओं और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

अटाली गांव के पास घटनास्थल पर फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की टीम ने भी बारीकी से जांच की। वहां से राख और मिट्टी के नमूनों के साथ जले हुए बेहद छोटे हड्डियों के टुकड़े और दांतों के अवशेष बरामद किए गए।

ये अवशेष जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।

डीएनए जांच ने खोला रहस्य

घटनास्थल से मिले अवशेषों के नमूने एकत्र करने के बाद उनकी तुलना स्वीटी पटेल के माता-पिता के डीएनए नमूनों से की गई।

डीएनए जांच के परिणाम में मिले अवशेषों का संबंध स्वीटी पटेल से होने की पुष्टि हुई। इस वैज्ञानिक प्रमाण ने स्वीटी के लापता होने के मामले में महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ दी और जांच का दायरा अजय देसाई तक पहुंच गया।

पूछताछ में सामने आई कथित स्वीकारोक्ति

जांच एजेंसियों द्वारा तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाने के बाद अजय देसाई से पूछताछ की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसने स्वीटी पटेल की हत्या करने और शव को ठिकाने लगाने की बात स्वीकार की थी।

मामले में उसके परिचित किरीटसिंह जाडेजा की भूमिका की भी जांच की गई। आरोप था कि शव को जलाने और सबूत नष्ट करने की कथित प्रक्रिया में उसकी मदद ली गई थी।

पुलिस अधिकारी पर हत्या का आरोप लगने से मची खलबली

इस मामले की सबसे गंभीर बात यह रही कि हत्या का आरोप उसी पुलिस अधिकारी पर लगा, जिस पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी। इस घटना ने पुलिस व्यवस्था, अधिकारियों की जवाबदेही और कानून के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी।

मामले ने यह भी दिखाया कि किसी अपराध को छिपाने और सबूत नष्ट करने की कितनी भी कोशिश की जाए, आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान, डीएनए जांच और तकनीकी निगरानी के जरिए जांच एजेंसियां सच्चाई तक पहुंच सकती हैं।

स्वीटी पटेल हत्याकांड से मिली बड़ी सीख

स्वीटी पटेल हत्याकांड केवल एक हत्या की जांच तक सीमित मामला नहीं रहा। इस मामले में गुमशुदगी की जांच से लेकर घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और डीएनए परीक्षण तक जांच की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आईं।

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि अपराधी चाहे कितनी भी सावधानी से सबूत मिटाने की कोशिश करे, वैज्ञानिक जांच और लगातार प्रयासों के सामने सच्चाई लंबे समय तक छिपी नहीं रह सकती।

स्वीटी पटेल के परिवार के लिए यह मामला लंबे संघर्ष और पीड़ा की कहानी रहा, वहीं गुजरात पुलिस के इतिहास में यह मामला एक ऐसे प्रकरण के रूप में दर्ज हुआ जिसमें कानून के रखवाले पर ही हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे।

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