रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप, स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग की
डभोई रेलवे स्टेशन पर पिछले काफी समय से चल रहे रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि निर्माण स्थल पर करीब 40 से 50 फीट की ऊंचाई पर मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है।
रोजी-रोटी के लिए गरीब श्रमिक अपनी जान जोखिम में डालकर ऊंचे पिलरों पर काम करने को मजबूर हैं, जबकि निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कथित कमी को लेकर जिम्मेदार ठेकेदार और रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी का आरोप
निर्माण कार्य में ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए हेलमेट, सेफ्टी हार्नेस, सुरक्षा जूते, जैकेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि डभोई रेलवे ओवरब्रिज की निर्माण साइट पर इन बुनियादी सुरक्षा उपायों की पर्याप्त व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। मजदूर ऊंचे पिलरों और निर्माणाधीन हिस्सों पर काम करते दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में यदि किसी श्रमिक का पैर फिसल जाए या संतुलन बिगड़ जाए तो इतनी ऊंचाई से गिरने पर गंभीर चोट या जान जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी हो चुकी है दुर्घटना, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था?
इस मामले में सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि इसी ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के दौरान पहले भी एक दुर्घटना हो चुकी है।
बताया गया है कि पूर्व में ब्रिज से गिरने के कारण दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त सुधार नहीं किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले हुई दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों की गंभीर समीक्षा की जाती तो मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा या उससे पहले श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?
ठेकेदार और रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन करवाना संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाने के चक्कर में श्रमिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि मजदूरों की जिंदगी किसी भी निर्माण परियोजना से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
स्थानीय लोगों ने रेलवे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल निर्माण स्थल का निरीक्षण करने, श्रमिकों को सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करवाने की मांग की है।
साथ ही, यदि जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी साबित होती है तो जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी उठ रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या उससे पहले ही जागकर मजदूरों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?

