अहमदाबाद। राजनीति में नैतिकता, भाषा और संस्कारों के मापदंड क्या सभी के लिए समान होने चाहिए? यह सवाल इन दिनों राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की कथित अभद्र या विवादित भाषा को लेकर भाजपा नेताओं और समर्थकों की ओर से संस्कृति, परंपरा और संस्कारों की दुहाई दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में भाजपा नेताओं की मौजूदगी में चर्चित स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना के सम्मान को लेकर कथित दोहरे मापदंड के आरोप लगाए जा रहे हैं।
समय रैना के सम्मान से बढ़ा विवाद
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विशेष मौजूदगी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना को आमंत्रित कर सम्मानित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
समय रैना अपने बेबाक, गाली-गलौज वाले और विवादित कंटेंट को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। उनके एक शो में कथित आपत्तिजनक भाषा को लेकर मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर सेल द्वारा पहले जांच किए जाने का भी उल्लेख किया जाता रहा है।
ऐसे में भाजपा नेताओं की मौजूदगी में समय रैना के सम्मान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि अभद्र भाषा को लेकर आपत्ति है, तो उसके मापदंड सभी के लिए समान क्यों नहीं होने चाहिए?
‘विरोधियों के लिए अलग नियम और अपने मंच पर अलग?’
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आलोचकों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि यदि अभद्र या मर्यादा से बाहर की भाषा गलत है, तो वह सभी के लिए गलत होनी चाहिए—चाहे वह प्रदर्शन कर रहे छात्र हों या सत्ता पक्ष के मंच पर मौजूद कोई कलाकार।
वहीं दूसरी ओर यह तर्क भी सामने आता है कि कलाकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपनी बात रखने की छूट मिलनी चाहिए। इसी आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि ऐसी सहनशीलता छात्रों और अन्य नागरिकों के मामले में भी क्यों नहीं दिखाई जानी चाहिए।
आलोचकों ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसकी नीति ‘विरोधियों को संस्कार का पाठ और अपने मंच पर सम्मान’ जैसी दिखाई दे रही है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस पूरे आरोप पर स्पष्ट प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
सम्मान के मंच से समय रैना का महाराष्ट्र साइबर सेल पर तंज
सम्मान समारोह के दौरान समय रैना ने अपने पुराने अंदाज में महाराष्ट्र साइबर सेल पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने मंच से अपने और साइबर सेल के पुराने संबंध का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 1930 नंबर सेव कर रखा है, क्योंकि वहां से कई बार फोन आ जाता है।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि साइबर सेल इतना सक्रिय है कि व्यक्ति अमेरिका में हो या भारत में, उसे पकड़ लेता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि इस बार पहली बार साइबर सेल के अधिकारी उन्हें गर्व के साथ मंच तक लेकर आए और इस बार उन्हें जेल या नोटिस नहीं बल्कि सम्मान मिला।
अब भाजपा के रुख पर सवाल
समय रैना के सम्मान के बाद भाजपा के नेताओं और समर्थकों द्वारा छात्रों की कथित अभद्र भाषा पर उठाए गए सवालों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
आलोचकों का कहना है कि भाषा और मर्यादा के लिए एक समान मापदंड होना चाहिए। अब सवाल यही उठ रहा है कि भाजपा का अभद्र भाषा को लेकर स्पष्ट और समान रुख क्या है और क्या राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार नैतिकता एवं संस्कारों के मापदंड बदलते हैं?
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

