अहमदाबाद। शहर के शांत और शैक्षणिक क्षेत्र माने जाने वाले वस्त्रापुर में छात्रों के एक समूह पर कथित रूप से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पढ़ाई कर रहे छात्रों पर कुछ लोगों ने अचानक लाठी, डंडे और बेसबॉल स्टिक से हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बताया जा रहा है।
शिकायत और सामने आए आरोपों के अनुसार, खुद को बजरंग दल से जुड़ा बताने वाले हिरन रबारी और उसके साथ आए कुछ लोगों पर छात्रों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित लोगों का पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
छात्रों पर हमला करने के साथ किताबें फाड़ने का भी आरोप
आरोप है कि हमलावरों ने केवल छात्रों के साथ मारपीट ही नहीं की, बल्कि उनके पास मौजूद पुस्तकों के साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया।
बताया गया है कि शहीद भगत सिंह के विचारों से जुड़ी किताबों को फाड़कर सड़क पर फेंक दिया गया। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों में नाराजगी जताई जा रही है।
घटना के बाद यूथ कांग्रेस और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से विरोध की आवाज उठाई गई है। संगठनों ने छात्रों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस स्टाफ के चालक से भी मारपीट का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने वस्त्रापुर पुलिस स्टेशन के स्टाफ के एक चालक के साथ भी मारपीट की।
यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला और गंभीर हो सकता है, क्योंकि पुलिसकर्मी से जुड़े कर्मचारी पर हमला कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के बावजूद मामला दर्ज करने में पुलिस की ओर से देरी की जा रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्थिति इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
घटना को लेकर विपक्षी नेताओं और स्थानीय लोगों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि सार्वजनिक स्थान पर छात्रों और पुलिस स्टाफ से जुड़े व्यक्ति के साथ कथित मारपीट करने वालों में इतनी हिम्मत कैसे आई।
कुछ लोगों ने इस मामले में राजनीतिक संरक्षण की आशंका भी जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, किसी राजनीतिक दल या नेता के संरक्षण में हमला किए जाने का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है।
अब मुख्य सवाल यह है कि पुलिस इस मामले में शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर क्या कार्रवाई करती है। छात्रों पर कथित हमले, पुस्तकों को नुकसान पहुंचाने और पुलिस स्टाफ के चालक से मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

