लखनऊ से संचालित नेटवर्क का खुलासा, गुजरात समेत देशभर में 2700 से अधिक नकली दवाओं की स्ट्रिप्स सप्लाई
अहमदाबाद।* हृदय रोग और उच्च रक्तचाप की नकली दवाओं को बाजार में पहुंचाने वाले अंतरराज्यीय रैकेट का अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (एफडीसीए) की संयुक्त टीम ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में अहमदाबाद के एक व्यापारी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ से संचालित इस नेटवर्क के जरिए गुजरात समेत देश के विभिन्न हिस्सों में 2700 से अधिक नकली दवाओं की स्ट्रिप्स सप्लाई की जा चुकी थीं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अधिक कमीशन और अतिरिक्त छूट का लालच देकर खुदरा दवा विक्रेताओं के माध्यम से नकली दवाओं की बिक्री कराई जा रही थी। इस तरह हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीजों की जान को गंभीर खतरे में डाला जा रहा था। पुलिस अब नकली दवाओं का उत्पादन करने वाली मुख्य फैक्ट्री तक पहुंचने के लिए दूसरे राज्यों में भी जांच कर रही है।
शिकायत के बाद हुआ नकली दवा रैकेट का खुलासा
जानकारी के अनुसार, अंकलेश्वर स्थित जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने औषधि विभाग में शिकायत की थी कि हृदय रोग और रक्तचाप के मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाली उनकी प्रसिद्ध दवा ‘निकार्डिया रिटार्ड 10 एमजी’ की नकली दवा लीलावती फार्मेसी एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बेची जा रही है।
शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने एक डमी ग्राहक भेजकर संदिग्ध दवा का नमूना खरीदा। जांच के दौरान दवा पर दर्ज बैच नंबर का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं का जखीरा बरामद किया। मामले में सिटी क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
देश के कई हिस्सों में पहुंचाई गईं नकली दवाएं
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क फरवरी 2026 से सक्रिय था। इस दौरान गुजरात समेत देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 2700 नकली दवाओं की स्ट्रिप्स सप्लाई की जा चुकी थीं।
लखनऊ से खरीदी गई नकली दवाओं में से अहमदाबाद की अलग-अलग एजेंसियों को बड़ी मात्रा में स्ट्रिप्स भेजी गई थीं। इनमें पारस इको मेडिकल को 900, अशोर हेल्थकेयर को 900, ग्लोबल फार्मा को 200, अरिहंत मेडिकल को 60 और गिरिराज हेल्थकेयर को 50 स्ट्रिप्स भेजी गई थीं।
इसके अलावा मैसूर की रक्षा एसोसिएट्स को 200 स्ट्रिप्स भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में सूरत, भावनगर, भुज और नडियाद में भी नकली दवाओं का जखीरा भेजे जाने का खुलासा हुआ है।
कमीशन लेकर गुजरात में सप्लाई करते थे नकली दवाएं
पुलिस ने इस मामले में अहमदाबाद की पार्श्व एजेंसी के दर्शिल गिरीशभाई संघवी तथा लखनऊ के देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को गिरफ्तार किया है।
जांच के मुताबिक, लखनऊ के दोनों आरोपी कमीशन लेकर गुजरात में नकली दवाओं की सप्लाई करते थे। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी इससे पहले महाराष्ट्र के पुणे में भी नकली दवा बेचने के मामले में पकड़े जा चुके हैं।
नकली दवाओं का उत्पादन करने वाली मुख्य फैक्ट्री तक पहुंचने के लिए पुलिस की तीन टीमें दूसरे राज्यों में जांच कर रही हैं। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली दवा के निर्माण एवं वितरण की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में जुटी है।
18 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त छूट का दिया जाता था लालच
खाद्य एवं औषधि विभाग के अनुसार, सामान्य तौर पर दवाओं में खुदरा विक्रेता का मार्जिन करीब *20 प्रतिशत, जबकि थोक विक्रेता का मार्जिन करीब *10 प्रतिशत होता है। लेकिन इस मामले में आरोपियों द्वारा व्यापारियों को 18 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त छूट देने का लालच दिया जाता था।
112.90 रुपये एमआरपी वाली 10 टैबलेट की स्ट्रिप* पर अधिक कमाई का लालच देकर यह पूरा फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। अतिरिक्त कमीशन और छूट के लालच में दवा विक्रेताओं के माध्यम से नकली दवाएं मरीजों तक पहुंचाई जा रही थीं।
मरीजों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं नकली दवाएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के मरीजों के लिए ऐसी नकली दवाएं बेहद घातक साबित हो सकती हैं। नकली दवाओं में जरूरी सक्रिय औषधीय घटक मौजूद नहीं होने के कारण मरीज को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पाता और उसकी स्थिति गंभीर हो सकती है।
एफडीसीए ने नागरिकों से अपील की है कि दवा खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें और दवा की पैकिंग पर की गई छपाई को ध्यान से जांचें।
विभाग के अनुसार, असली ‘निकार्डिया’ दवा की स्ट्रिप पर बैच नंबर और समाप्ति तिथि की स्टीरियो प्रिंटिंग तीन लाइनों में होती है, जबकि नकली दवा की स्ट्रिप पर यही जानकारी दो लाइनों में दिखाई दी।
एफडीसीए ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी दवा की पैकिंग, बैच नंबर या छपाई को लेकर संदेह होने पर इसकी सूचना तत्काल खाद्य एवं औषधि विभाग को दें, ताकि नकली दवाओं की बिक्री और सप्लाई पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

