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अन्याय का पर्दाफाश? स्वास्थ्य विभाग में किरण परिख के खिलाफ बड़े राजनीतिक-प्रशासनिक षड्यंत्र के आरोप

अहमदाबाद।* गुजरात के स्वास्थ्य क्षेत्र और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक गंभीर और विवादित मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रतिष्ठित दलित परिवार से जुड़े किरण परिख के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और विरोधी तत्वों द्वारा कथित रूप से षड्यंत्र रचे जाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, उनके परिवार ने लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सेवाएं दी हैं तथा उनके पिता ने गुजरात में निःशुल्क डायलिसिस सेवा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर उठाया जा रहा है। उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, 10 मार्च 2025 को स्वास्थ्य विभाग के सर्वोच्च अधिकारी की ओर से किरण परिख को लगाए गए सभी आरोपों से क्लीन चिट दिए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद 23 अप्रैल 2025 को स्वास्थ्य मंत्री के आदेश का हवाला देते हुए डॉ. प्रांजल मोदी द्वारा किरण परिख को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटा दिया गया।

नौकरी से हटाने के दो दिन बाद बनाई गई जांच समिति

मामले में एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह बताया जा रहा है कि किरण परिख को नौकरी से हटाने के दो दिन बाद, 25 अप्रैल 2025 को जांच समिति का गठन किया गया।

अतिरिक्त निदेशक (चिकित्सा शिक्षा) राघवेंद्र दीक्षित की अध्यक्षता में गठित समिति में जीएमएससीएल के महाप्रबंधक डॉ. समिध शाह और प्रशासनिक अधिकारी श्री चरपोट को सदस्य बनाया गया था।

आरोप है कि समिति ने 3 सितंबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग से जुड़े किसी व्यक्ति का बयान लिए बिना एकतरफा और पूर्वाग्रहपूर्ण प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि जांच किसी बाहरी प्रभाव के कारण प्रभावित हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तीन पीढ़ियों से सरकारी और सार्वजनिक जीवन में योगदान का दावा

किरण परिख के परिवार की तीन पीढ़ियों द्वारा गुजरात सरकार और सार्वजनिक जीवन में योगदान देने का दावा किया गया है। उनके पिता हरगोविंदभाई परमार ने पांच दशकों से अधिक समय तक डायलिसिस क्षेत्र में सेवाएं दीं। दावा है कि गुजरात में घर के नजदीक उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवाओं के विस्तार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

पद्मश्री डॉ. एच. एल. त्रिवेदी द्वारा उन्हें दिए गए सम्मानपत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उनकी सेवाओं की सराहना की गई थी। बताया गया है कि उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्रियों जय नारायण व्यास, नितिन पटेल और ऋषिकेश पटेल के नेतृत्व में भी कार्य किया।

दादा जनसंघ के समय से रहे सक्रिय कार्यकर्ता

किरण परिख के दादा के बारे में बताया गया है कि वे जनसंघ के दौर से संगठन के जमीनी कार्यकर्ता रहे और 1967 से 1972 तक कड़ी विधानसभा सीट से विधायक भी रहे। इसके बाद संघ की ओर से उन्हें राज्यसभा के लिए चुने जाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया था। उन्हें भाजपा की ओर से जोटाणा विधानसभा सीट से टिकट दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

परिवार के अनुसार, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में 30 वर्षों से अधिक समय तक सेवा की। इसी राजनीतिक विरासत से प्रेरित होकर किरण परिख ने अपने गृह क्षेत्र कड़ी और कर्मभूमि अहमदाबाद में भाजपा के समर्थन में चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।

डायलिसिस मशीनों के कथित भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवाल

पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल 600 डायलिसिस मशीनों की खरीद से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को लेकर उठाया जा रहा है। विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर विवाद होने और चार कर्मचारियों के निलंबन का उल्लेख किया गया है।

वहीं, किरण परिख के निलंबन संबंधी पत्र में कथित तौर पर ‘कदाचार’ या ‘गैरवर्तन’ का उल्लेख किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष का सवाल है कि एक ही मामले में अलग-अलग लोगों के खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई क्यों की गई।

इसी आधार पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या किसी बड़े मामले में जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए किरण परिख को बलि का बकरा बनाया गया? हालांकि, यह एक आरोप और सवाल के रूप में सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर आरोप लगाने वाले पक्ष ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। साथ ही राज्य सरकार से भी तत्काल हस्तक्षेप कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और यदि कोई अधिकारी या व्यक्ति नियमों के विरुद्ध कार्रवाई में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

पूरे प्रकरण में अब मुख्य सवाल यही है कि किरण परिख के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुई या नहीं। साथ ही, डायलिसिस मशीनों की खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और उससे संबंधित कार्रवाई की भी निष्पक्ष जांच होने पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

नोट : उपरोक्त खबर में लगाए गए षड्यंत्र, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप संबंधित पक्ष द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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