अहमदाबाद। मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाएं बनाकर गुजरात के बाजार में सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में अहमदाबाद और लखनऊ से जुड़े तीन आरोपी पकड़े गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे और नेटवर्क से जुड़े ठिकानों की जांच के दौरान नडियाद और भुज से भी नकली दवाओं का बड़ा जखीरा बरामद किया है।
जीवनरक्षक दवा के नाम पर नकली दवा की सप्लाई
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दर्शिल संघवी, देवेंद्र यादव और उमंग रास्तोगी को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में दर्शिल संघवी अहमदाबाद का स्थानीय दवा कारोबारी बताया गया है, जबकि देवेंद्र यादव और उमंग रास्तोगी लखनऊ के रहने वाले हैं।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाली NICARDIA RETARD 10 नाम की दवा की नकली प्रतियां तैयार कर उन्हें बाजार में बेचता और सप्लाई करता था।
नडियाद और भुज तक पहुंचा नकली दवाओं का नेटवर्क
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन स्थानों पर भी कार्रवाई की, जहां से गुजरात में नकली दवाओं की आपूर्ति किए जाने की जानकारी मिली थी।
जांच के दौरान नडियाद और भुज से नकली दवाओं का बड़ा जत्था बरामद किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए गुजरात के किन-किन शहरों और मेडिकल दुकानों तक नकली दवाओं की आपूर्ति की गई।
अहमदाबाद का कारोबारी बना नेटवर्क की अहम कड़ी
पुलिस जांच में सामने आया है कि अहमदाबाद में दवाओं का कारोबार करने वाला दर्शिल संघवी इस पूरे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी था। आरोप है कि लखनऊ के देवेंद्र यादव और उमंग रास्तोगी नकली दवाओं को तैयार करने अथवा हासिल करने के बाद दर्शिल के माध्यम से गुजरात के अलग-अलग शहरों में इसकी आपूर्ति करते थे।
इस तरह लखनऊ से तैयार या खरीदी गई नकली दवाएं अहमदाबाद के रास्ते गुजरात के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाई जा रही थीं।
लखनऊ के दोनों आरोपी पहले भी पकड़े जा चुके हैं
जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि लखनऊ के रहने वाले देवेंद्र यादव और उमंग रास्तोगी इससे पहले भी पुणे में इसी तरह के गंभीर नकली दवा मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर फिर से नकली दवाओं के कारोबार में कदम रखा। अब पुलिस उनके पुराने मामलों और गुजरात में सामने आए नेटवर्क के बीच भी कड़ियों की जांच कर रही है।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का गंभीर मामला
ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज नियमित रूप से दवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में असली दवा के नाम पर नकली दवा की बिक्री मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली दवाओं का उत्पादन कहां किया जाता था, इन्हें गुजरात तक किस माध्यम से पहुंचाया जाता था और इस पूरे नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस की आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली दवाओं की सप्लाई के पूरे तंत्र का खुलासा होने की उम्मीद है।

