महाराष्ट्र के नासिक जिले में एशिया की सबसे बड़ी प्याज थोक मंडी लासलगांव से करीब 450 टन प्याज लेकर एक विशेष मालगाड़ी बुधवार दोपहर दिल्ली के लिए रवाना हुई। कांदा एक्सप्रेस के आज गुरुवार 27 अगस्त को देर रात तक दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। दिल्ली के बाजारों में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत उपभोक्ता मामलों के विभाग के निर्देश पर इस ट्रेन की व्यवस्था की गई थी।
नासिक : इस साल दो केंद्रीय एजेंसियों ने 1.2 लाख टन गर्मी के मौसम वाली प्याज खरीदी थी। नाफेड के एक सीनियर अधिकारी ने बुधवार को बताया कि इसमें से लगभग 30% प्याज सड़ने और अंकुरित होने की वजह से खराब हो चुकी है। इसी बीच, केंद्र के बफर स्टॉक से 500 टन प्याज लेकर पहली स्पेशल प्याज ट्रेन, ‘कांदा एक्सप्रेस’, दोपहर करीब 3:30 बजे लासलगांव से दिल्ली के लिए रवाना हुई। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि प्याज के खराब होने की मुख्य वजह कटाई के मौसम में बेमौसम बारिश थी। इससे प्याज की क्वालिटी खराब हुई और उसकी शेल्फ-लाइफ (रखे रहने की क्षमता) कम हो गई, जिससे लंबे समय तक स्टोर करना मुश्किल हो गया। आम तौर पर हर साल लगभग 20% प्याज खराब होती है, लेकिन इस साल यह आंकड़ा 40% तक पहुंच सकता है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कांदा लेकर ट्रेन को मंगलवार को ही रवाना होना था, लेकिन ग्रेडिंग और छंटाई के काम में देरी के कारण यह लगभग 24 घंटे देर से निकली। लासलगांव रेलवे स्टेशन के स्टेशन मैनेजर प्रीतिश दुबे ने कहा कि कांदा एक्सप्रेस लगभग 500 टन प्याज लेकर लासलगांव से रवाना हुई और इसके 24 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।
रोड ट्रांसपोर्ट से भी आ रहा प्याज
कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें 50-65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने बाजार में दखल देते हुए यह रेल ट्रांसपोर्ट शुरू किया है। रेल ट्रांसपोर्ट के अलावा, केंद्र ने अपनी खरीद एजेंसियों – नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) – के ज़रिए सड़क मार्ग से भी प्याज भेजना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि नाफेड ने मंगलवार रात ट्रक से 30 टन प्याज दिल्ली भेजी, जबकि NCCF ने बुधवार शाम को 30 टन की एक और खेप भेजी।
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कोलकाता और चेन्नई भी जाएगा प्याज
सूत्रों ने बताया कि कोलकाता और चेन्नई के लिए भी ऐसी ही प्याज ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारी प्रमुख खपत वाले केंद्रों में सप्लाई बेहतर करने और कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने पहले ही घोषणा कर दी है कि ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल के तहत लाई गई प्याज दिल्ली में नाफेड, NCCF और केंद्रीय भंडार आउटलेट्स के ज़रिए 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर बेची जाएगी। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में रेल से भेजी जाने वाली खेप चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी भी भेजी जा सकती हैं।
बफर स्टॉक पर दबाव
केंद्र ने गर्मियों की प्याज की खरीद का लक्ष्य 2 लाख टन रखा था, लेकिन नेफेड (Nafed) और एनसीसीएफ (NCCF) मिलकर सिर्फ 1.20 लाख टन ही खरीद पाए, जो लक्ष्य से बहुत कम है। इस साल का 90% से ज्यादा बफर स्टॉक अकेले नासिक इलाके से आया है, जहां से आम तौर पर कुल खरीद का 80% से ज्यादा हिस्सा आता है। नेफेड के अधिकारी ने कहा कि किसानों के स्टोरेज में रखे प्याज के तेजा से खत्म होने और खरीद किए गए 30% माल के सड़ने या अंकुरित होने की वजह से सप्लाई की स्थिति और मुश्किल हो गई है।
इस बार जून-जुलाई में ही निकाला प्याज का स्टॉक
आमतौर पर, किसान सितंबर से स्टोर किया हुआ प्याज बाजार में लाना शुरू करते हैं। लेकिन इस साल, कई किसानों ने खराब होने से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जून और जुलाई में ही अपना स्टॉक बेचना शुरू कर दिया। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा, थोक बाजार में बेहतर दाम मिलने की वजह से भी किसान खरीद एजेंसियों के बजाय बाजार में प्याज बेचने लगे।
नासिक के स्टोरेज में 25 पर्सेंट स्टॉक ही
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, भारत में प्याज पैदा करने वाले सबसे बड़े इलाके नासिक ज़िले में लगभग 24 लाख टन की स्टोरेज क्षमता है, लेकिन किसानों के पास उनके स्टोरेज में सिर्फ़ 25% स्टॉक ही बचा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर प्याज खराब होते रहे और उनकी शेल्फ-लाइफ़ (रखने की अवधि) कम होती गई, तो ताज़ा सप्लाई आने से पहले ही, सितंबर के आखिर या अक्टूबर की शुरुआत तक मौजूदा स्टॉक खत्म हो सकता है।
खरीफ की फसल में देरी से सप्लाई में कमी का डर
बुवाई के मौसम में कम बारिश की वजह से खरीफ प्याज की फसल में काफी देरी हो रही है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में खरीफ प्याज की खेती का औसत रकबा लगभग 30,000 हेक्टेयर है, जबकि अब तक सिर्फ 370 हेक्टेयर में ही खरीफ प्याज की रोपाई हो पाई है। आम तौर पर, मौसम के इस चरण तक लगभग आधी रोपाई पूरी हो जाती है, लेकिन अभी यह प्रगति सिर्फ 1% है।
अब खरीफ का नया प्याज नवंबर के मध्य तक ही बाजार में आने की उम्मीद है और नियमित आवक दिसंबर की शुरुआत से होने की संभावना है, इसलिए व्यापारियों को अक्टूबर में सप्लाई में कमी का डर है। कृषि अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा स्टॉक इसी रफ़्तार से कम होता रहा, तो ज़िले में सितंबर और अक्टूबर के दौरान प्याज की कमी हो सकती है।
सप्लाई के लिए अहम पांच महीने
फिलहाल, बाजार मुख्य रूप से मार्च और अप्रैल में काटी गई गर्मियों की प्याज पर निर्भर है। आमतौर पर इन प्याजों को छह से सात महीने तक रखा जा सकता है और किसान इन्हें साल भर अलग-अलग समय पर बेचने के लिए स्टोर करके रखते हैं। कृषि विभाग के एक और अधिकारी ने कहा कि खरीफ की फसल आने तक, अगले कुछ महीनों में प्याज की कोई खास नई फसल आने की उम्मीद नहीं है। इस दौरान, होलसेल और रिटेल मार्केट में सप्लाई के लिए स्टोर किए गए प्याज ही मुख्य स्रोत होते हैं। हालांकि, व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि अगर बहुत ज्यादा खराब होने या समय से पहले स्टॉक खत्म होने की वजह से मौजूदा स्टोरेज साइकल में रुकावट आती है, तो सप्लाई और कम हो सकती है, जिससे आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

