इश्क, पेपर लीक और फिर ब्रेकअप, जी हां इसी वजह से महाराष्ट्र में MPSC ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का खुलासा हुआ है। मुंबई पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए एमपीएससी के तीन ऑफिसर्स समेत कुल छह को अरेस्ट किया है।
हाइलाइट्स
प्रेमिका को पास कराने के लिए पेपर लीक कराने का आरोप
ब्रेकअप के बाद बॉयफ्रेंड ने ही दी शिकायत, 6 गिरफ्तार
5 लाख में पेपर बेचने का दावा, लेन-देन की जांच शुरू
मुंबई: महाराष्ट्र में ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा (ग्रुप-बी) के पेपर लीक मामले का खुलासा ‘लव स्टोरी’ और ‘ब्रेक अप’ से हुआ। आप भले ही यकीन न करें लेकिन सच यही है कि अपनी प्रेमिका को परीक्षा में पास कराने के लिए कथित तौर पर पेपर का इंतजाम कराने वाले बॉयफ्रेंड ने ब्रेकअप के बाद खुद ही पेपर लीक का राज खोल दिया था। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इनमें महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के तीन अधिकारी भी शामिल हैं, जिनमें एक अवर सचिव और दो सहायक कक्ष अधिकारी हैं। इन आरोपियों पर परीक्षा के पेपर तक पहुंच बनाने, उसे लीक करने और आगे पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप है।
प्रेमिका हो गई पास, लेकिन परीक्षा कैंसल
22 मार्च को ड्रग इंस्पेक्टर पद की परीक्षा हुई थी। जुलाई में इसका रिजल्ट आया। बाद में, पेपर लीक होने की जानकारी सामने आने पर परीक्षा कैंसल कर दी गई। इसके बाद MPSC ने मुंबई पुलिस से संपर्क किया और जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई, जिसका लीड डीसीपी राज तिलक रौशन कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि लोकेश उर्फ गौरव पाटील का ऋतुजा पाटील नाम की युवती से प्रेम संबंध था। आरोप है कि गौरव ने ऋतुजा को परीक्षा में पास कराने के लिए पेपर हासिल किया और उसे ऋतुजा समेत कुछ अन्य लोगों तक पहुंचाया। ऋतुजा परीक्षा में पास हो गई। वह मेरिट सूची में सातवें स्थान पर रहीं।
ब्रेकअप हुआ तो प्रेमी ने खोल दिया राज
पुलिस के मुताबिक, बाद में गौरव और ऋतुजा के बीच प्रेम संबंध खराब हो गए और दोनों का ब्रेकअप हो गया। इसके बाद गौरव ने कथित तौर पर MPSC को पेपर लीक की जानकारी दे दी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए MPSC ने केस की जांच के लिए 27 जुलाई को मुंबई पुलिस से संपर्क किया।
MPSC के तीन अधिकारी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में अभिजित गणपतराव लेंडवे (38) MPSC में अवर सचिव के पद पर कार्यरत है। विश्वेश्वर दत्तात्रय नकाते (35) और गोपाळ भटु मराठे (37) महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग में सहायक कक्ष अधिकारी हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि परीक्षा के गोपनीय पेपर तक इन अधिकारियों की पहुंच किस स्तर तक थी और पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया कैसे इन्होंने अंजाम दी। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में नंदुरबार स्थित कोचिंग अकादमी के निदेशक के अलावा दिलीप पाटील (40), लोकेश उर्फ गौरव राजेंद्र पाटील (24) और अमृत नामदेव पाटील (55) शामिल हैं।
ऋतुजा को नोटिस, पिता भी गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने ऋतुजा को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अमृत नामदेव पाटील भी शामिल हैं, जो ऋतुजा के पिता हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक से किस-किस को फायदा पहुंचा और इस पूरे नेटवर्क में MPSC के अधिकारियों की भूमिका क्या थी। किला कोर्ट ने आरोपियों को 2 सितंबर तक क्राइम ब्रांच की हिरासत में भेज दिया है।
नासिक कड़ी भी जांच के दायरे में
शिकायत के मुताबिक, कोचिंग संचालक प्रवीण पाटिल ने मयूर ठाकरे के जरिए प्रश्न पत्र की फोटोकॉपी अमृत पाटिल को नासिक के पाथर्डी फाटा में सौंपी। पुलिस ने बताया कि वह यह भी देख रही है कि लीक सामग्री के लिए पैसे मांगे गए थे या नहीं। हालांकि, शिकायत में वित्तीय लाभ के तहत करीब 5 लाख रुपये के भुगतान के संकेत भी मिले हैं। सीनियर पीआई मंगेश देशाई केस की जांच कर रहे हैं।
‘जांच में पाया गया कि केवल एक उम्मीदवार को प्रश्न का सेट प्राप्त हुआ और उससे लाभ हुआ था। यह गोपनीय प्रश्न MPSC के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्न सेट से अवैध तरीके से निकाले गए थे। लीक सवालों के आधार पर एक अलग प्रश्न पत्र तैयार कर उसे वितरित किया गया। इससे MPSC परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता में सेंध लगी।’ डीसीपी राज तिलक रोशन, अपराध शाखा, मुंबई पुलिस
बड़े पेपर लीक नेटवर्क से कनेक्शन की जांच
देशाई ने बताया कि अपराध शाखा वट्सएप चैट, प्रश्न पत्रों की फोटोकॉपी, डिजिटल सबूत, परीक्षा के रिकॉर्ड और आरोपियों के बयानों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गोपनीय प्रश्न सामग्री तक पहुंच किस तरह बनी, लीक सवाल किस चैनल से फैले और क्या यह मामला किसी बड़े पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ा है।
इन धाराओं में केस दर्ज
शिकायत के आधार पर महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षाएं (दुरुपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 2024, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रासंगिक प्रावधानों और धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश समेत अन्य अपराधों से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

