मध्य प्रदेश के डबरा नगर पालिका में सियासी खींचतान के बीच पार्षदों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। अपनी मांगों और समस्याओं की अनदेखी से नाराज पार्षद भैंस लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंच गए और उसके सामने बीन बजाई। भाजपा उपाध्यक्ष के समर्थकों ने सीएमओ और अध्यक्ष पर सुनवाई न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश का डबरा नगर पालिका इन दिनों अपने विकास कार्यों से ज्यादा राजनीतिक ड्रामे और अनोखे विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुर्खियों में छाया हुआ है। नगर पालिका परिसर के भीतर पार्षदों द्वारा किया गया एक ऐसा प्रदर्शन सामने आया है जिसने स्थानीय प्रशासन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। सुनवाई न होने से खफा पार्षदों ने विरोध का जो रास्ता चुना, उसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
भैंस के आगे बीन बजाकर पार्षदों ने जताया कड़ा रोष
अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटकने के बाद जब पार्षदों की सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अनोखा तरीका अपनाया। नाराज पार्षद सीधे नगर पालिका कार्यालय परिसर में एक जीवित भैंस लेकर पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने उस भैंस के सामने बीन बजाकर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की।
पार्षदों का साफ कहना था कि मुट्ठी भर अफसरों और जनप्रतिनिधियों की हठधर्मिता के आगे उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। इस अनोखे और प्रतीकात्मक प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य कुंभकर्ण की नींद सोए प्रशासन को जगाना था।
बीजेपी उपाध्यक्ष के समर्थन वाले पार्षदों का अनिश्चितकालीन धरना
डबरा नगर पालिका का यह विवाद अब पूरी तरह से खुलकर राजनीतिक रंग ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उपाध्यक्ष सतेंद्र दुबे के समर्थन वाले पार्षदों ने नगर पालिका परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
पार्षदों का मुख्य आरोप है कि उनकी शिकायतों, जनता से जुड़े मुद्दों और विकास कार्यों से जुड़ी मांगों पर अपेक्षित स्तर पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इसी उदासीन रवैये के चलते उन्होंने धरना बीच में ही समाप्त करने के बजाय आंदोलन को अनिश्चितकाल तक जारी रखने का सख्त फैसला किया है। इस अंदरूनी सियासी घमासान ने नगरपालिका के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीएमओ और अध्यक्ष से नहीं हो पाई थी मुलाकात
विवाद की शुरुआत तब हुई जब पार्षद नगर पालिका सीएमओ साक्षी वाजपेई और अध्यक्ष लक्ष्मी देवी से मिलकर अपनी समस्याएं रखना चाहते थे। लेकिन आरोप है कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी मुलाकात संबंधित अधिकारियों से नहीं हो पाई।
जब जिम्मेदार लोगों ने मिलने से कन्नी काट ली, तब पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने विरोध का यह नायाब रास्ता चुना। नगर पालिका परिसर में भैंस के सामने बीन बजाए जाने का दृश्य जैसे ही सामने आया, वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई।
जब तक समाधान नहीं, तब तक जारी रहेगा आंदोलन
धरने पर बैठे पार्षदों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यह आंदोलन तब तक समाप्त नहीं किया जाएगा जब तक उनकी समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा नहीं होती। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर जल्द ही ठोस पहल नहीं की गई, तो विरोध के इस दायरे को और ज्यादा व्यापक बनाया जाएगा।

