मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक बार फिर से नातरा प्रथा की चर्चा है। यह प्रथा कई बार हिंसक रूप ले लेती है। प्रथा में कुछ भी कानूनी नहीं है लेकिन अगर एक महिला अपने पूर्व पति से अलग होती है तो 50 लाख रुपए का अलगाव फीस होता है।
हाइलाइट्स
राजगढ़ में फिर जीवित हो रहा नातरा प्रथा
पंचायत के फैसले अब ले रहे हैं हिंसक रूप
हाल ही में पंचायत में आए हैं दो नए मामले सामने
एक में महिला के पति को चुकाने होंगे 50 लाख रुपए
राजगढ़: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 145 किमी दूर उत्तर-पश्चिम में राजगढ़ स्थित है। इस जिले के कुछ हिस्सों में आज भी नातरा प्रथा प्रचलित है। इस प्रथा का एक काला पक्ष है। इस प्रथा में, जब कोई महिला एक शादी छोड़कर दूसरी शादी करती है, तो ‘झगड़ा’ के नाम पर पैसे की मांग की जाती है।
फिर से चर्चा में है नातरा प्रथा
हाल ही में घटित दो मामलों ने नतारा प्रथा को फिर से चर्चा में ला दिया है। राजगढ़ पुलिस ने शनिवार को दो अलग-अलग मामलों में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन मामलों में कथित रूप से 50 लाख और 10 लाख रुपए की मांग की गई थी। पैसे न मिलने पर धमकियां दी गईं और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
पत्नी ने कर दी दूसरी शादी तो 50 लाख रुपए की मांग की
आरोप है कि 42 वर्षीय रामचरण गुर्जर ने रामजीवन गुर्जर के परिवार से 50 लाख रुपए की मांग की है। क्योंकि उसकी पूर्व पत्नी दीपू बाई ने आपसी सहमति से रामजीवन से शादी कर ली थी। जब पैसे नहीं मिले तो शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसकी मक्के की फसल काट ली गई और उसे धमकियां दी गईं।
दूसरे मामले में 10 लाख रुपए की मांग
वहीं, एक अन्य मामले में 55 वर्षीय घीसालाल तंवर और उनके बेटे मांगीलाल पर आरोप है कि उन्होंने मनीषा के पिता से 10 लाख रुपए की मांग की, जब मनीष वैवाहिक विवाद के बाद अपने मायके लौट आई थी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई तो कथित तौर पर मक्के की फसल काट ली गई और हिंसा की धमकियां दी गईं।
‘झगड़ा’ तय करने के लिए बैठती है पंचायत
अजीब बात यह है कि यह राशि कैसे तय की जाती है। इसके लिए कोई अदालत या कानूनी फीस नहीं होती। इसके बजाए ‘झगड़ा’ तय करने के लिए एक पंचायत बैठती है। इसके फैसले को ‘फड़ गति’ नामक दस्तावेज में दर्ज किया जाता है।
महिला के पिता को मिलता है एक बिल
यह बिल महिला के पिता पर आ सकता है। खासकर अगर वह अपने पूर्व पति के पास लौटने से इनकार कर दे, या फिर उसके नए पति पर, अगर वह दूसरी शादी कर ले। यह रकम लाखों हो सकती है। जब पैसे नहीं जुटाए जा पाते तो मामला हिंसक हो सकता है।
हिंसा का लेते हैं सहारा
राजगढ़ पुलिस और स्थानीय निवासियों के अनुसार, पैसे की मांग करने वाले लोग डराने-धमकाने और हिंसा का सहारा लेते हैं। जैसे फंसलें काटना या जलाना, संपत्ति को नुकसाना पहुंचाना और झोपड़ियों या पशुओं के बाड़ों में आग लगाना है। पुराने विवाद हत्या तक में बदल जाते हैं।
मान्यता देने के लिए नहीं है कोई कानून
इस तरह के अलगाव शुल्क को मान्यता देने वाला कोई कानून नहीं है, इसलिए पुलिस जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य अपराधों से संबंधित धाराओं के तहत शिकायतों को संभालती है।

