डभोई नगर पालिका क्षेत्र की सड़कों की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। पूरे शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी सड़कें खराब हो चुकी हैं, ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क गड्ढे में है या गड्ढे में गड्ढा। नगर पालिका चुनाव में स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान कर सत्ता परिवर्तन कर कांग्रेस को सत्ता सौंपी थी। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बावजूद मानो शहरवासियों की किस्मत नहीं बदली, विकास के नाम पर कोई ठोस काम न होने से लोगों में गहरा गुस्सा है।
गड्ढों का साम्राज्य, प्रमुख इलाके हो चुके हैं जर्जर
डभोई कस्बे में जहां भी नजर डालो, सिर्फ गड्ढों का साम्राज्य ही नजर आता है। खासकर महुडी भागोल, एस.टी. डिपो रोड, जनता नगर और नवी नगरी, राणा होटल से स्टेशन रोड, स्टेट बैंक एरिया, काजीवाड़ मस्जिद के आस-पास का एरिया—ये सभी बड़े और हमेशा चहल-पहल वाले इलाके गाड़ी चलाने वालों और पैदल चलने वालों के लिए खतरनाक हो गए हैं क्योंकि बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे गुजरना खतरनाक हो गया है। दोपहिया वाहन सवार अक्सर फिसलकर घायल हो रहे हैं।
खोखला मिथक: नगर निगम को अच्छे से भरकर पैसे मिल रहे हैं
स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर निगम अधिकारियों को बार-बार लिखकर और बोलकर बताने के बावजूद नतीजा ज़ीरो रहा है। प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए गड्ढों को मिट्टी या मेटल-बजरी से भरकर संतुष्ट हो जाता है। यह भराव गाड़ियों के आने-जाने और बारिश की आम बौछारों में बह जाता है, जिससे हालात वैसे ही बने रहते हैं।
इमरजेंसी और गर्भवती महिलाओं के लिए सड़कें मुसीबत बनीं
खराब सड़कों ने आम जीवन पर असर डाला है, लेकिन सबसे गंभीर स्थिति बीमार मरीजों और डिलीवरी के लिए ले जाई जा रही महिलाओं की है। एंबुलेंस या प्राइवेट गाड़ियों में गड्ढों की वजह से गर्भवती महिलाओं की जान खतरे में है। बुज़ुर्गों और बच्चों का इन सड़कों से गुज़रना बहुत मुश्किल हो गया है।
लोगों का सवाल: हमें इस तकलीफ़ से कब छुटकारा मिलेगा?
स्थानीय लोगों में बहस है कि लोगों ने बड़ी उम्मीदों के साथ बदलाव लाकर कांग्रेस को सत्ता सौंपी थी, लेकिन शासक लोगों की बुनियादी सुविधाओं के प्रति पूरी तरह से बेपरवाह साबित हुए हैं।
स्थानीय लोगों की आवाज़ और विरोध के नारे:
“काजीवाड़ से नवीनगरी जाने में हमें बहुत मुश्किल होती है। हम जैसे बुज़ुर्गों को भी चलने में बहुत दिक्कत हो रही है। सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि पानी भरने के बाद गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसा लगता है कि गड्ढों में पानी है या पानी में गड्ढे! इस इलाके के लोगों ने पूरी ताकत से पार्षदों को वोट दिया था, लेकिन अब हमारी मांग है कि ये पार्षद जागें और जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करें।” — नागिनभाई सुनीलभाई पाटनवाडिया (स्थानीय निवासी)
“नवीनगरी से परबाड़ी तक सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि एक गंभीर स्थिति बन गई है, जहाँ महिलाएँ डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुँचने से पहले रिक्शे में ही डिलीवरी करवाती हैं। स्थिति इतनी खराब है कि अगर हम किसी ड्राइवर को इस इलाके में आने के लिए कहते हैं, तो वे सिर्फ़ नाम सुनकर मना कर देते हैं। हमारी माँग है कि नगरसेवक जल्द से जल्द अपनी कुंभकर्णी नींद से जागें और इस भयानक समस्या का समाधान करें।” सलमाबेन सलीमबाही मंसूरी (स्थानीय
निवासी)

