लंदन। लंदन की टेम्स नदी के तट पर भव्य संत संसद का आयोजन हुआ, जिसका सफल संचालन नेटवर्क टेन के मुख्य संपादक संजय गिरी जी महाराज ने किया। इस कार्यक्रम की व्यवस्था सिद्धाश्रम के पीठाधीश्वर राजराजेश्वर गुरु जी द्वारा की गई थी।
इस अवसर पर भारत सहित पूरे विश्व से पधारे संतों और भक्तों ने एक साथ क्रूज़ पर हनुमान जी का पूजन-पाठ किया एवं सुंदरकांड का पाठ संपन्न कराया। सभी उपस्थित जनों की भक्ति भावना और “जय सनातन, जय श्री राम” के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
इस अवसर पर उपस्थित सभी संतों ने टेम्स नदी को “तमसा नदी” के रूप में सम्मान देते हुए कहा कि जिस प्रकार भारत की नदियों के प्रति श्रद्धा और पवित्र दृष्टिकोण है, उसी प्रकार लंदन की यह ऐतिहासिक और ज्ञानदायिनी नदी भी अब पवित्र मानी जाएगी। इसी क्रम में सभी संतों ने विधिवत रूप से टेम्स नदी में 21 लीटर गंगाजल प्रवाहित कर इसे पवित्र किया। संतों ने कहा कि अब लंदन में रहने वाले हिंदू समाज के लोग सरकार की सहमति के साथ यहाँ पूजन-पाठ एवं छठ पूजन कर सकते हैं। इससे भारत की भांति लंदन की टेम्स नदी के प्रति भी एक पवित्र दृष्टिकोण स्थापित होगा, जो अपने पर्व-त्योहारों को मनाने का माध्यम बनेगी।
जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि यहाँ के हिंदुओं के लिए तमसा नदी संत संसद की ओर से एक अनमोल उपहार है। उन्होंने कहा — “हम तो इसका नामकरण कर सकते हैं, बाकी कार्य आप सबको करना है। हम सनातनियों की पताका पूरे विश्व में लहराएगी, क्योंकि विश्व वसुधैव कुटुम्बकम है, पूरा विश्व एक परिवार है और आपसी प्रेम-भाईचारे से ही सबको जोड़ा जा सकता है।” 21 लीटर गंगाजल प्रवाहित करने के पश्चात उन्होंने कहा कि यह टेम्स नदी अब तमसा नदी के समान पवित्र हो चुकी है।
इस अवसर पर पंडोखर सरकार ने सभी के लिए मंगल कामना की और कहा कि यह अब पवित्र तमसा नदी बन चुकी है। महामंडलेश्वर उमाकांत आनंद जी महाराज ने वैदिक संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर बल दिया। श्री महंत नारायण गिरी जी महाराज ने कहा कि पूरे विश्व में सनातन की पताका लहराएगी। नेटवर्क टेन के मुख्य संपादक संजय गिरी जी ने कहा कि यह संत संसद अब पूरे विश्व में आयोजित होगी।
कार्यक्रम में गोवा स्वामी जी ने योग एवं वैदिक शिक्षा पर अपने विचार रखे, वहीं पूज्य माताजी ने विश्व भर की बेटियों को अपनी सनातन संस्कृति की ओर लौटने का आह्वान किया। प्रसिद्ध कथावाचक चिन्मयानंद बापू ने भी इस अवसर पर सहभागिता की।
इस पावन आयोजन में जिन प्रमुख संत-महात्माओं ने भाग लिया, उनमें श्री महंत रिश्वेश्वर नंद जी महाराज, महामंडलेश्वर यतींद्रानंद जी महाराज तथा महामंडलेश्वर उमाकांतानंद जी महाराज सहित, निरंजन स्वामी, जैन मुनि जी, महामंडलेश्वर स्वामी धीरेंद्र पुरी जी, अन्य अनेक पूज्य संतजन एवं भक्त सम्मिलित रहे।

