राजनांदगांव। पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन आईरा इंटरनेशनल के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने आज कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिले में बीमा एजेंसी के संचालन में कथित अनियमितताओं की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में संगठन ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले में कुछ शासकीय कर्मचारी सेवा नियमों को दरकिनार कर अपनी पत्नी, भाई अथवा अन्य परिजनों के नाम पर ली गई बीमा एजेंसी का कार्य स्वयं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि शासकीय सेवा में रहते हुए किसी अन्य व्यवसाय का संचालन सेवा आचरण नियमों के विरुद्ध बताया गया है। इरा ने कहा है कि यदि परिजन के नाम पर एजेंसी है और कार्य वास्तव में कर्मचारी स्वयं कर रहा है, तो यह बेनामी संचालन की श्रेणी में आ सकता है, जिसकी जांच होना आवश्यक है।
ग्राहकों को हो सकता है जोखिम, इसलिए जांच जरूरी
ज्ञापन में ग्राहकों के हित को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। संगठन का आरोप है कि इस तरह से संचालित एजेंसियों से पॉलिसी लेने वाले ग्राहकों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इरा के अनुसार, क्लेम के समय ग्राहक को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता, क्योंकि पॉलिसी बेचने वाला व्यक्ति कागजों पर एजेंट नहीं होता। ज्ञापन में प्रस्ताव पत्र पर हस्ताक्षर को लेकर भी जांच की मांग की गई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में प्रस्ताव पत्र पर कथित रूप से परिजन के हस्ताक्षर स्वयं किए जाने की शिकायतें मिली हैं। संगठन ने कहा है कि यदि ऐसा है तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए, ताकि ग्राहक की पॉलिसी भविष्य में फर्जी अथवा विवादित न मानी जाए।
बेरोजगार अभिकर्ताओं के रोजगार पर असर का आरोप
ज्ञापन में दूसरा बड़ा मुद्दा बेरोजगार अभिकर्ताओं के हित का उठाया गया है। इरा का कहना है कि बीमा कार्य को ही अपना पूर्णकालिक रोजगार मानने वाले सैकड़ों अभिकर्ता दिन-रात मेहनत कर अपना घर चलाते हैं।
आरोप है कि शिक्षक, सहकारी समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और सेल्समैन जैसे पदों पर कार्यरत कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से एजेंसी कार्य किए जाने की शिकायतों के कारण इन अभिकर्ताओं का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। संगठन ने कहा है कि जिन लोगों के पास सरकारी नौकरी के रूप में सुरक्षित आय है, यदि वे भी बीमा व्यवसाय में उतरेंगे तो बेरोजगार युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
आइरा ने की ये 4 मांगें
ज्ञापन में प्रशासन से मुख्य रूप से 4 मांगें की गई हैं –
- जिले में परिजनों के नाम पर संचालित हो रही संदिग्ध बीमा एजेंसियों की सूची बनाकर जांच कराई जाए।
- जांच में यह देखा जाए कि एजेंसी का कार्य वास्तव में लाइसेंसधारी व्यक्ति कर रहा है या कोई अन्य।
- प्रस्ताव पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
- जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि नियमों के पालन और ग्राहकों व वास्तविक अभिकर्ताओं के हितों की रक्षा की है।
ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है।

