Homeभारतगुजरातलाखों की लागत से बना सड़क एक महीने में ही उखड़ा, डभोई...

लाखों की लागत से बना सड़क एक महीने में ही उखड़ा, डभोई में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

फरतीकुई से पूड़ा जाने वाले नवनिर्मित मार्ग से गायब हुई डामर की परत, जगह-जगह उखड़ी गिट्टी से हादसों का खतरा; ग्रामीणों ने ठेकेदार और अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग की

डभोई। वडोदरा जिले के डभोई तालुका में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फरतीकुई से पूड़ा जाने वाले नवनिर्मित मुख्य मार्ग की हालत निर्माण के कुछ ही दिनों बाद खराब होने लगी है। लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस सड़क से डामर की परत उखड़ गई है और जगह-जगह गिट्टी तथा कंकड़ बाहर निकल आए हैं। सड़क की बदहाल स्थिति को देखकर स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद उन्हें मजबूत और टिकाऊ सड़क की सुविधा नहीं मिल पाई।

निर्माण के दौरान निगरानी नहीं होने का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान मार्ग एवं मकान विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर काम की गुणवत्ता की जांच करने में गंभीर लापरवाही बरती। ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों की निगरानी के अभाव में ठेकेदार ने मनमाने तरीके से निर्माण कार्य कराया। सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री और कम गुणवत्ता वाले डामर का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

वाहन चालकों के लिए बढ़ा दुर्घटना का खतरा

सड़क से डामर उखड़ने के बाद बड़ी मात्रा में गिट्टी और कंकड़ बाहर फैल गए हैं। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बिखरी गिट्टी के कारण वाहनों के फिसलने का खतरा बना रहता है। तेज गति से गुजरने वाले वाहनों के पहियों से कंकड़ उछलकर राहगीरों को भी चोट पहुंचा सकते हैं। ऐसे में यह मार्ग आम लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकता है।

जांच और दोबारा निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री के नमूनों की तकनीकी जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि निर्धारित मानकों के अनुसार काम हुआ था या नहीं।

लोगों ने मांग की है कि दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क की केवल औपचारिक मरम्मत कराने के बजाय गुणवत्तापूर्ण तरीके से दोबारा निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या नहीं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments