महानगर मेट्रो ब्यूरो : नंदुरबार / मुंबई : महाराष्ट्र की सीमा से सटे नंदुरबार जिले का नवापुर क्षेत्र इन दिनों अवैध गतिविधियों और संदिग्ध कारनामों के चलते सुर्खियों में है। पुलिस और प्रशासनिक निगरानी के तमाम दावों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर चलाए जा रहे गैर-कानूनी कारोबारों का मामला उजागर हुआ है। जूना आरटीओ (नवी आरटीओ) के पास, श्रीराम पार्क और इंडियन पेट्रोल पंप के ठीक पीछे बिदखिपाड़ा गांव के इलाके में शेड बनाकर चलाए जा रहे इस बड़े नेटवर्क ने आसपास के पूरे माहौल को संदिग्ध और असुरक्षित बना दिया है।
नामजद आरोपियों और संदिग्ध नेटवर्क की कार्यशैली पर खुलासा
सूत्रों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का संचालन लकड़कोट के पप्पू गोस्वामी, नवापुर के रईस शेख और सूरज जायसवाल जैसे विवादास्पद लोगों की सहभागिता से किए जाने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार अंतरराज्यीय अपराधियों और अवैध गतिविधियों के बड़े सिंडिकेट्स से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जाता है कि इस स्थान पर हर रात महाराष्ट्र, गुजरात, दमन और मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग और संदिग्ध प्रवृत्ति के व्यक्ति इकट्ठा होते हैं। देर रात तक चलने वाले इस खेल में लाखों-करोड़ों रुपयों का लेन-देन होने और कई अनैतिक गतिविधियों के संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जुए के साथ अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों की भरमार
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग द्वारा जताई गई चिंताओं के मुताबिक, यह स्थान केवल जुए के अड्डे तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ अन्य अनैतिक एवं गैर-कानूनी गतिविधियां भी बेरोकटोक जारी हैं:
नशीले पदार्थों की बिक्री: युवाओं को निशाना बनाकर एमडी (MD) ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के नेटवर्क को हवा देने के आरोप लग रहे हैं।
अनैतिक देहव्यापार एवं गतिविधियां: अनैतिक गतिविधियों और संदिग्ध लोगों के जमावड़े के कारण आसपास का सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है।
अवैध तस्करी: महाराष्ट्र-गुजरात सीमा का फायदा उठाकर शराब और गुटखा जैसी अवैध वस्तुओं के परिवहन की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस तंत्र की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मुख्य सड़क और सर्वविदित लैंडमार्क (जूना आरटीओ, श्रीराम पार्क, इंडियन पेट्रोल पंप) के पीछे इतने बड़े पैमाने पर गतिविधियां चलने के बावजूद स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस और संबंधित विभागों की ढिलाई या कथित मौन सहमति के बिना ऐसा नेटवर्क लंबे समय तक चलना असंभव है। जब भी इस प्रकार की गतिविधियों पर कार्रवाई की बातें सामने आती हैं, तब जानकारी लीक होने या अस्थाई रूप से जगह बदल दिए जाने जैसी बातें सामने आती हैं।
गृह विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों से ठोस कार्रवाई की मांग
‘महानगर मेट्रो’ इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करता है। इस रिपोर्ट के माध्यम से शासन और प्रशासन के ध्यान में निम्नलिखित बिंदु लाए जा रहे हैं:
१. उच्चस्तरीय जांच: राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह विभाग द्वारा तुरंत संज्ञान लेकर पूरे मामले की विशेष टीम से जांच कराई जाए।
२. जवाबदेही तय हो: स्थानीय पुलिस स्टेशन (PI), एलसीबी (LCB) और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए तथा लापरवाही पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
३. अवैध स्थल पर सख्त कार्रवाई: बिदखिपाड़ा और श्रीराम पार्क के पीछे बने इन अवैध शेडों और ठिकानों को चिन्हित कर पूरी तरह ध्वस्त किया जाए।
यदि समय रहते इस नेटवर्क पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह क्षेत्र किसी बड़ी आपराधिक वारदात का केंद्र बन सकता है। स्थानीय जनता की सुरक्षा और कानून के इकबाल को बनाए रखने के लिए अब तुरंत और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।

