लाखों टन कचरे के ढेर जलकर हुए खाक, ठेका एजेंसी की कार्यप्रणाली और महानगरपालिका के अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
सूरत। शहर की ड्रीम सिटी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के नजदीक स्थित खजोद डंपिंग साइट पर लगी भीषण आग अब विवादों में घिरती जा रही है। आग लगने की घटना के समय और परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि कचरे के निस्तारण और जैविक खनन का काम संभालने वाली ठेका एजेंसी का अनुबंध समाप्त होने में महज चार दिन शेष थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आग महज दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी। हालांकि, आग के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जानकारी के अनुसार, सूरत महानगरपालिका ने खजोद डंपिंग साइट पर जमा कचरे के निस्तारण और जैविक खनन के लिए करोड़ों रुपये का ठेका दिया था। एजेंसी को निर्धारित समय सीमा में कचरे का प्रसंस्करण पूरा करना था। काम अधूरा रहने की स्थिति में जुर्माना लगाने और एजेंसी को काली सूची में डालने जैसी कार्रवाई का प्रावधान था।
लेकिन अनुबंध समाप्त होने से ठीक चार दिन पहले डंपिंग साइट पर अचानक भीषण आग लग गई। आग की चपेट में हजारों टन कचरा आ गया और आसमान में दूर तक धुएं का गुबार फैल गया। इस घटना ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि कहीं अधूरे काम और संभावित अनियमितताओं से जुड़े सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से तो आग नहीं लगाई गई थी। हालांकि, यह फिलहाल केवल आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
दूसरी ओर, आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के बावजूद एजेंसी कचरे के निस्तारण का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई। साइट पर अब भी बड़ी मात्रा में कचरे के ढेर मौजूद थे। इसके बावजूद महानगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से समय रहते कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आग के कारण आसपास के इलाकों में जहरीला धुआं फैलने से स्थानीय निवासियों और पशुओं के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो गया। लोगों ने प्रशासन से धुएं पर नियंत्रण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
अब इस पूरे मामले में ठेका एजेंसी और महानगरपालिका के अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। यह पता लगाना जरूरी है कि आग किन परिस्थितियों में लगी, कचरा निस्तारण का वास्तविक लक्ष्य कितना पूरा हुआ और समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जांच के बाद ही संभावित लापरवाही या साजिश की वास्तविकता सामने आ सकेगी।

