शहरी इलाकों की 28 सीटों पर खतरे को देखते हुए रणनीति की समीक्षा; बीजेपी कार्यकर्ताओं को ‘कमल साथी’ ऐप के जरिए घर-घर जाकर फॉर्म इकट्ठा करने के सख्त निर्देश
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला विवाद सामने आया है। राज्य की मतदाता सूची में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (S.I.R.) प्रक्रिया के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर गहरी चिंता जताई है। बीजेपी राज्य कार्यकारिणी की बैठक और आंतरिक समीक्षा के दौरान, मुख्यमंत्री ने एक बड़ा दावा किया: राज्य की मतदाता सूची से लगभग 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम गायब हो गए हैं—एक ऐसी घटना जिससे आगामी चुनावों में गंभीर राजनीतिक नुकसान हो सकता है। जनसंख्या के आंकड़ों और वास्तविक मतदाता सूची के बीच बड़ा अंतर
आंकड़े पेश करते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर, उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 16 करोड़ से अधिक होनी चाहिए; लेकिन, वर्तमान आंकड़ा केवल 13 करोड़ के आसपास है।
सीएम योगी ने इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि इसका सीधा असर शहरी क्षेत्रों की लगभग 28 महत्वपूर्ण नगर निगम सीटों पर पड़ता है और वे कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा, राज्य में लगभग 43 से 45 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां जीत का अंतर बहुत कम है; ऐसे में, इस विसंगति के कारण चुनाव परिणामों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
किन समूहों और कमियों को उजागर किया गया है?
समीक्षा बैठक के दौरान, निम्नलिखित तथ्य सामने आए:
सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने वाले 55 लाख से अधिक लाभार्थियों के नाम सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से गायब या हटाए गए पाए गए। 18-19 आयु वर्ग के नए युवा मतदाताओं (लगभग 4.5 लाख लोग) के नाम अद्यतन मतदाता सूची में ठीक से शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा, ऐसी शिकायतें भी सामने आई हैं कि शादी के बाद दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश आईं महिलाओं के नाम बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
पार्टी नेतृत्व और संगठन का बड़ा अभियान चलाने का निर्देश
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी सांसदों , विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे हाथ पर हाथ धरे न बैठें। इसके बजाय, उन्हें ‘कमल साथी’ ऐप और बूथ लेवल अधिकारियों की मदद से तुरंत घर-घर जाकर सर्वे करने का निर्देश दिया गया है।
जिन पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे या छूट गए थे, उन्हें फिर से सूची में शामिल करने के लिए ‘फॉर्म-6’ भरवाने का काम युद्ध स्तर पर पूरा करने का आदेश दिया गया है। आगामी ड्राफ्ट मतदाता सूची और भविष्य के चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री के इस कदम ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

