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अमरेली के बाबरा में बेमौसम बारिश से किसानों की फसल भीगी, दिवाली के बीच आर्थिक संकट गहराया

बाजार समिति के खुले मैदान में रखी कपास और मूंगफली बारिश की चपेट में आईं; नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की किसानों ने उठाई मांग

अमरेली। गुजरात के अमरेली जिले के बाबरा क्षेत्र में दिवाली के दौरान हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देर रात अचानक हुई बारिश के कारण बाबरा कृषि उपज बाजार समिति के खुले मैदान में बिक्री के लिए रखी बड़ी मात्रा में कपास और मूंगफली भीग गई। महीनों की मेहनत के बाद उपज लेकर बाजार पहुंचे किसानों को अचानक मौसम बदलने से नुकसान उठाना पड़ा है। त्योहार के समय हुई इस घटना ने किसानों की खुशियों पर पानी फेर दिया है और उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, दिवाली की छुट्टियों से पहले बाबरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसान अपनी कपास और मूंगफली की उपज बेचने के लिए बाजार समिति पहुंचे थे। बाजार में फसल की आवक अधिक होने और भंडारण की पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में उपज खुले मैदान में रखी हुई थी। इसी दौरान देर रात मौसम में अचानक बदलाव आया और बारिश शुरू हो गई। किसानों को अपनी फसल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। देखते ही देखते खुले में रखी कपास और मूंगफली बारिश में भीग गई।

किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरे मौसम में मेहनत कर फसल तैयार की थी। पहले ही मौसम की अनिश्चितता और खेती की बढ़ती लागत ने उनकी परेशानियां बढ़ा रखी थीं। ऐसे में फसल बेचने के लिए बाजार पहुंचने के बाद अचानक हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। किसानों को आशंका है कि भीगी हुई उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने से उन्हें बाजार में उचित भाव नहीं मिल पाएगा।

किसानों के सामने अब दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक ओर फसल की गुणवत्ता खराब होने की चिंता है, वहीं दूसरी ओर दिवाली और शादी-ब्याह के मौसम में होने वाले खर्चों का दबाव भी है। किसानों का कहना है कि यदि व्यापारी भीगी हुई कपास और मूंगफली खरीदने से बचते हैं या कम कीमत लगाते हैं, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बाजार समिति में खुले में रखी उपज को लेकर व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिक आवक के समय फसल को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए थे।

घटना के बाद स्थानीय किसानों और समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बाबरा बाजार समिति के साथ आसपास के गांवों में भी बारिश से प्रभावित किसानों की स्थिति का सर्वे कराया जाना चाहिए। जिन किसानों की उपज खराब हुई है, उन्हें नियमानुसार आर्थिक सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

अब किसानों की निगाहें प्रशासन और बाजार समिति के जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रभावित उपज की स्थिति का आकलन कर किसानों को राहत दिलाने के लिए शीघ्र कदम उठाए जाएं, ताकि त्योहार के समय उन्हें हुए आर्थिक नुकसान का बोझ कुछ कम हो सके।

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