वीडियो रिकॉर्ड करने को लेकर सुरक्षाकर्मियों ने आक्रामक रुख अपनाया; मामला बढ़ने पर पुलिस को दखल देना पड़ा, जिसके बाद खातोदरा पुलिस स्टेशन में लिखित माफी मांगी गई।
सूरत : दक्षिण गुजरात की सबसे बड़ी और प्रमुख चिकित्सा सुविधा, सूरत न्यू सिविल अस्पताल, एक बार फिर मरीजों की परेशानी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण विवादों में घिर गया है। भारी सरकारी फंडिंग और व्यापक सुविधाओं के दावों के बावजूद, अस्पताल में तब हंगामा मच गया जब एक बुजुर्ग मरीज को एक्स-रे के लिए समय पर व्हीलचेयर नहीं मिल सकी। इतनी बुनियादी सुविधा न मिलने से मरीज के परिजन भड़क गए, जिसके बाद अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों
के साथ उनकी तीखी बहस हुई और अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया।
व्हीलचेयर न मिलने से बुजुर्ग महिला को परेशानी: व्यवस्था पर उठे सवाल।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिविल अस्पताल में इलाज कराने आईं एक बुजुर्ग महिला को डॉक्टर ने एक्स-रे कराने की सलाह दी। लेकिन पता चला कि अस्पताल के बेहद भीड़भाड़ वाले माहौल में मरीजों को ले जाने के लिए पर्याप्त व्हीलचेयर या स्ट्रेचर ही उपलब्ध नहीं थे।
परिजनों के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई व्हीलचेयर नहीं मिली, जिससे पहले से ही काफी तकलीफ झेल रहीं मरीज को पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे उन्हें भारी परेशानी हुई। मरीज का असहनीय दर्द और प्रशासन की उदासीनता देखकर परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने अस्पताल के कुप्रबंधन के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया।
वीडियो डिलीट करने को लेकर सुरक्षाकर्मियों और परिजनों के बीच तीखी बहस।
जब परिजनों ने अपनी लाचारी और प्रशासनिक लापरवाही को दिखाने के लिए मोबाइल फोन पर स्थिति को रिकॉर्ड करने की कोशिश की, तो सिविल अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत दखल दिया। सुरक्षाकर्मियों ने रिकॉर्डिंग करने से सख्ती से मना किया और फुटेज को डिलीट करने का दबाव डाला।
इसके चलते सुरक्षाकर्मियों और आक्रोशित परिजनों के बीच तीखी बहस और जोरदार टकराव हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद मरीजों और भीड़ के बीच भारी हंगामा मच गया।
पुलिस का दखल और मामला खातोदरा पुलिस स्टेशन तक पहुंचा। जब स्थिति बेकाबू होने लगी, तो अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और हालात को संभालने की कोशिश की। अस्पताल में हुए हंगामे को देखते हुए, पुलिस ने परिवार के सदस्यों को अपनी गाड़ी में बिठाया और खतोदरा पुलिस स्टेशन ले गई।
पुलिस स्टेशन में, दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप (जिसमें अपशब्द कहने के आरोप भी शामिल थे) के बाद, परिवार के सदस्यों से लिखित माफीनामा लिखवाकर मामला सुलझा लिया गया। हालांकि इस लिखित माफीनामे से यह विवाद तो खत्म हो गया, लेकिन सिविल अस्पताल की खराब व्यवस्था और कुप्रबंधन को लेकर लोगों में भारी नाराजगी अभी भी बनी हुई है। ‘पक्को गुजरात न्यूज़’ जनहित में, अस्पतालों में होने वाली ऐसी लापरवाही के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाना जारी रखेगा।

