जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि महाराज ने पूर्व राज्यसभा सदस्य आर.के. सिन्हा के निधन को बताया अपूरणीय क्षति
“12 हजार से 12 हजार करोड़ तक का सफर और सनातन सेवा को समर्पित रहा संपूर्ण जीवन” — स्वामी चक्रपाणि
नई दिल्ली : अखिल भारत हिन्दू महासभा, संत महासभा एवं श्री चित्रगुप्त अखाड़ा न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतगुरु सनातन सम्राट परम पूज्य स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने प्रख्यात उद्योगपति, समाजसेवी, संगत-पंगत अभियान के प्रणेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य आर.के. सिन्हा (बाबूजी) के महानिर्वाण पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे न केवल एक परिवार या समाज की, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र, सनातन धर्म और सामाजिक समरसता की ऐसी अपूरणीय क्षति बताया है जिसकी भरपाई होना असंभव है।
समाज के अनमोल कोहिनूर थे ‘बाबूजी’
जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने अपने शोकसंदेश में भावुक होते हुए कहा, “मैंने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि आर.के. सिन्हा बाबूजी समाज की अमूल्य धरोहर और समाज के कोहिनूर हैं। आज उनके जाने से समाज ने अपना वह अनमोल रत्न खो दिया है, जिसने अपने पुरुषार्थ, परिश्रम और अथक सेवा से लाखों लोगों के जीवन में उम्मीद की रोशनी जलाई।”
स्वामी जी ने रेखांकित किया कि बाबूजी ने जीवन के अंतिम क्षण तक समाज को संगठित, शिक्षित, संस्कारित और सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास किए। ‘संगत-पंगत’ अभियान के माध्यम से उन्होंने समाज के बीच की दूरियां और ऊंच-नीच के भेदभाव मिटाने का जो ऐतिहासिक कार्य किया, वह हमेशा स्वर् अक्षरों में अंकित रहेगा।
चित्रगुप्त मंदिर का पुनरुद्धार और उद्योग जगत में मिसाल
आर.के. सिन्हा बाबूजी की भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज के प्रति अटूट और अगाध श्रद्धा थी। पटना स्थित प्राचीन भगवान श्री चित्रगुप्त मंदिर के पुनरुद्धार तथा देश-विदेश में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान अनुकरणीय रहा है।
उद्योग जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले बाबूजी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की प्रेरणा से सुरक्षा सेवा क्षेत्र में कदम रखा था। कई मंचों पर वे गर्व से याद करते थे कि उन्होंने अपने जीवन का सफर मात्र 12 हजार रुपये से शुरू किया था और 12 हजार करोड़ रुपये के मुकाम तक पहुंचने का श्रेय वे पूरी तरह भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की कृपा और सेवा को देते थे। इतनी अपार सफलता के बावजूद वे हमेशा अपनी भारतीय संस्कृति, सादगी और संस्कारों से जुड़े रहे।
शिक्षा, सेवा और सादगी की मिसाल
गरीब, मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उन्होंने हमेशा उच्च शिक्षा और कोचिंग के द्वार खोले। उनके प्रयासों से अनगिनत जरूरतमंद बच्चों को आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचने का मार्ग मिला। इसके अलावा, वे पारंपरिक भारतीय भोजन और मोटे अनाजों के प्रबल समर्थक थे, जो नई पीढ़ी को हमेशा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देते थे।
“बाबूजी के साथ बिताए आत्मीय पल जीवनभर रहेंगे अविस्मरणीय”
अपने व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि महाराज अत्यंत भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “यह मेरा सौभाग्य था कि बाबूजी मुझे बेहद स्नेह और सम्मान देते थे। जब भी वे दिल्ली में होते, बड़े आत्मीय भाव से मुझे भोजन पर आमंत्रित करते। हम साथ बैठकर समाज, राष्ट्र और सनातन धर्म के उत्थान पर लंबी चर्चा करते थे।”
उन्होंने कहा कि बाबूजी का उनके प्रति अटूट प्रेम और विश्वास हमेशा उनकी स्मृतियों में जीवित रहेगा।
अधूरे सेवा कार्यों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
पिछले डेढ़ वर्ष से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करने के बाद उनका गोलोकगमन हुआ है। अखिल भारत हिन्दू महासभा, संत महासभा और श्री चित्रगुप्त अखाड़ा न्यास की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वामी चक्रपाणि महाराज ने देशवासियों से आह्वान किया कि बाबूजी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी ‘संगत-पंगत’ की मशाल को बुझने न दें और सनातन संस्कृति तथा समाज सेवा के उनके संकल्पों को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।

