भावी इंजीनियरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़: मेस से मिली अखाद्य सामग्री की भारी खेप
छात्रों की जिंदगी खतरे में डालने वाले मेस संचालकों के खिलाफ आक्रोश, भोजन की गुणवत्ता सुधारने की उग्र मांग
गुजरात के अग्रणी और प्रतिष्ठित एल.डी. इंजीनियरिंग कॉलेज (LD Engineering College) के हॉस्टल और मेस को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। छात्रों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ करने वाले मेस संचालकों की करतूतों का भंडाफोड़ करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा मेस पर सरप्राइज चेकिंग (औचक छापा) की गई। इस जांच के दौरान जो दृश्य सामने आए, उन्होंने सभी के होश उड़ा दिए हैं। मेस की रसोई से सड़े हुए आलू, प्याज और एक्सपायर हो चुकी खाद्य सामग्री का भारी जत्था बरामद हुआ है, जिससे विद्यार्थियों में भारी रोष व्याप्त है।
रेड में क्या मिला? सड़ी सब्जियों और अखाद्य पदार्थों का साम्राज्य
राज्यभर से इंजीनियरिंग का सपना लेकर अहमदाबाद आने वाले युवा एल.डी. कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं। ये छात्र जिस मेस में भोजन करते हैं, वहाँ उनकी सेहत के साथ किस हद तक खिलवाड़ किया जा रहा था, इस काले सच को ABVP के कार्यकर्ताओं ने उजागर किया है।
सड़ी हुई सब्जियाँ: रसोई की जांच करने पर अंदर से सड़े हुए और भारी दुर्गंध मारते आलू और प्याज के जत्थे मिले, जिनमें से कीड़े भी निकल रहे थे।
एक्सपायर खाद्य सामग्री: भोजन बनाने में उपयोग होने वाले मसाले और अन्य खाद्य सामान भी एक्सपायर डेट (तारीख समाप्त) वाले थे।
स्वच्छता का भारी अभाव: रसोई में भयंकर गंदगी और लापरवाही देखने को मिली, जिसे देखकर कोई भी सामान्य व्यक्ति वहाँ का भोजन करने से कांप उठे।
छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
जो भावी इंजीनियर देश का भविष्य गढ़ने वाले हैं, यदि उन्हें ही जहरीला और सड़ा हुआ खाना परोसा जाए, तो उनके स्वास्थ्य का क्या होगा? इसी सवाल के साथ ABVP के कार्यकर्ताओं ने मेस संचालकों को घेर लिया और जोरदार हंगामा किया। छात्रों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद मेस संचालकों और
कॉलेज प्रशासन द्वारा भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
इस सरप्राइज चेकिंग के बाद कॉलेज कैंपस में खलबली मच गई है। ABVP ने कॉलेज प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द से जल्द मेस की गुणवत्ता नहीं सुधारी गई और लापरवाह संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

