चीफ ऑफिसर और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से स्टील-सीमेंट के मानकों की उड़ी धज्जियां: “नीचे से लेकर गांधीनगर तक चल रहा है हफ्ता राज” – जनता में भारी आक्रोश
गुजरातभर में विकास के दावों के बीच स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं और नगरपालिकाओं या महानगरपालिकाओं में चल रही अनियमितताएं और भ्रष्टाचार अब सीधे सत्ता और सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आनंद जिले के करमसद और आनंद क्षेत्र से सामने आया एक बेहद सनसनीखेज मामला फिलहाल चर्चा के केंद्र में है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाए जा रहे ‘वाइट टॉपिंग रोड’ (कंक्रीट रोड) के निर्माण में बरसे गए व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर जनता और जागरूक नागरिकों में उग्र रोष फूट पड़ा है। स्थिति ऐसी है कि यह सब देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो कुछ अदूरदर्शी अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र द्वारा जानबूझकर सरकार को बदनाम करने का बीड़ा उठाया गया हो!
टेंडर की शर्तों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा घटिया निर्माण
प्राप्त गंभीर आरोपों के अनुसार, करमसद और आनंद क्षेत्र में मंजूर हुए वाइट टॉपिंग रोड के निर्माण में टेंडर प्रक्रिया में तय किए गए नियमों, स्टील की गुणवत्ता और सीमेंट-कंक्रीट के उचित अनुपात को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। टेंडर के मुताबिक जो सामग्री इस्तेमाल करनी चाहिए, उसके बजाय बिल्कुल घटिया दर्जे की सामग्री का उपयोग करके करोड़ों रुपये की रकम डकार जाने का आरोप है।
सवाल यह उठता है कि जब निर्माण की गुणवत्ता पर खुलेआम सवाल उठ रहे हों और ठेकेदारों द्वारा सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हों, तब संबंधित चीफ
ऑफिसर और नगरपालिका अधिकारी क्या कर रहे हैं? अभी तक इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई या आपराधिक कदम क्यों नहीं उठाया गया है? क्या प्रशासनिक तंत्र किसी बड़ी मिलीभगत के तहत इस पूरे घोटाले पर पर्दा डाल रहा है?
“40% कमिशनराज और नीचे से गांधीनगर तक हफ्ता राज!”
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप यह लगाया जा रहा है कि सिस्टम में मानो भ्रष्टाचार की दीमक सब कुछ खोखला कर रही हो। चर्चा का विषय बने इस घोटाले में खुलेआम कहा जा रहा है कि यदि सिस्टम में ‘40% कमिशनराज’ चल रहा हो, तो फिर ठेकेदार से बेहतरीन गुणवत्ता की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
जमीनी स्तर से लेकर गांधीनगर तक चलने वाले इस कथित ‘हफ्ता राज’ के कारण ही जनता की पसीने की कमाई और टैक्स के करोड़ों रुपये बेहिसाब बर्बाद हो रहे हैं। आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, जबकि दूसरी ओर सरकारी तिजोरी के बलबूते अधिकारियों और बिचौलियों की तिजोरियां छलक रही हैं। यदि सरकार में बैठे या जिम्मेदार पदों पर आसीन लोग ही इस तरह के भ्रष्टाचार के प्रति आंखें मूंदे रहेंगे, तो आम जनता का प्रशासनिक तंत्र से विश्वास उठ जाना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिकों और जागरूक अग्रणियों की अब केवल एक ही मांग है कि करमसद-आनंद के इस वाइट टॉपिंग रोड घोटाले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और एजेंसी द्वारा जांच कराई जाए। इस मामले में शामिल चीफ ऑफिसर, भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कम से कम सख्त और अनुकरणीय कदम न उठाए गए, तो आने वाले दिनों में जनता द्वारा उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी जा रही है।

