हरिद्वार। देशभर में भारी दहशत और सनसनी मचाने वाले साल 2006 के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय से सभी मामलों में निर्दोष घोषित होने के बाद पिछले 11 नवंबर, 2025 को जेल से रिहा हुआ 53 वर्षीय सुरेंद्र कोली हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान में मृत अवस्था में मिला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। जघन्य अपराधों के आरोपों से बरी होकर नई जिंदगी शुरू करने का प्रयास करने वाला कोली जेल से बाहर आने के कुछ ही महीनों के भीतर मौत के मुंह में समा गया।
पहचान छिपाकर ‘सदा राम’ के नाम से चलाता था चाय की दुकान
19 साल तक जेल की सलाखों के पीछे बिताने के बाद रिहा हुआ सुरेंद्र कोली हरिद्वार में अपनी असली पहचान छिपाकर ‘सदा राम’ के नाम से रह रहा था। अतीत के काले दागों से दूर भागने के लिए उसने वहीं चाय की एक छोटी दुकान शुरू की थी। आश्चर्य की बात यह है कि चाय की दुकान शुरू करने के मात्र 5 दिनों के भीतर ही यह घटना घट गई। शुक्रवार (18 सितंबर, 2026) सुबह दुकान देर तक न खुलने पर आसपास के ग्राहकों और श्रद्धालुओं को शक हुआ, उन्होंने अंदर झांककर देखा तो वहां सुरेंद्र कोली का शव पड़ा मिला।
आधार कार्ड से हुआ असली पहचान का खुलासा
स्थानीय लोगों ने तुरंत ही पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद हरिद्वार पुलिस का दल घटनास्थल पर पहुंच गया। प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस को उसके पास मिले पहचान पत्र से उसकी असली पहचान का पता चला। पुलिस को मौके से आत्महत्या से जुड़ा कोई पत्र नहीं मिला है, जिसके कारण उसकी मौत के पीछे का सटीक कारण अभी भी रहस्य बना हुआ है। हालांकि, पुलिस ने प्रथम दृष्टया उसके द्वारा स्वयं ही जीवन समाप्त करने (आत्महत्या) की आशंका व्यक्त की है।
क्या था देश को हिलाकर रख देने वाला ‘निठारी हत्याकांड’?
दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 में स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगले से कई निर्दोष बच्चों और महिलाओं के कंकाल तथा मानव अंग मिले थे। पंढेर के घर नौकर के रूप में काम करने वाले सुरेंद्र कोली पर मासूम बच्चों के अपहरण, दुष्कर्म, नृशंस हत्या और नरभक्षण जैसे अत्यंत क्रूर और भयानक आरोप लगे थे। इन घृणित कृत्यों के कारण देशभर में लोग उसे ‘निठारी का नरभक्षी’ के रूप में जानते थे।
13 मामलों में निर्दोष घोषित होने के बाद आया था बाहर
निठारी कांड में निचली अदालतों द्वारा सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में सबूतों के अभाव और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने उसे सभी 13 मामलों में निर्दोष घोषित कर दिया था। निर्दोष छूटने के बाद उसने समाज से दूर एक गुमनाम जिंदगी जीने का रास्ता चुना था। लेकिन कुदरत का न्याय कहें या किस्मत का खेल, जेल की सलाखों से बाहर आने के कुछ ही समय बाद उसका इस तरह से दुखद अंत हो गया। पुलिस ने शव को शव परीक्षण के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

