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अंबाजी धाम में आस्था का अनादर: श्रद्धालुओं के दान के पैसे से सत्तारूढ़ दल का राजनीतिक आयोजन ‘कानूनी चंदा चोरी’ के समान

बनासकांठा। विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं का अपमान करती सरकार, धार्मिक परंपराओं को दरकिनार करके जिलाधिकारी और न्यास द्वारा आस्था का व्यापार होने के गंभीर आरोपों के साथ महानगर मेट्रो ने मोर्चा खोल दिया है। गरीब और मध्यमवर्ग के श्रद्धालु अपने आराध्य माता अंबाजी के चरणों में पेट काटकर एक-एक रुपया समर्पित करते हैं। परंतु उस पवित्र दान की राशि पर राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही होने का आक्रोश महानगर मेट्रो के प्रवक्ता हेमांग रावल ने व्यक्त किया है।

परंपराओं और नियमों की धज्जियां

प्रधानमंत्री के छिहत्तर वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अंबाजी मंदिर में आयोजित छिहत्तर हजार दीपों के दीपोत्सव के लिए मंदिर के खजाने से बीस लाख रुपये का बड़ा खर्च किया जा रहा है। दलगत कार्यक्रम के लिए मंदिर का पैसा: आयोजन के निमंत्रण पत्र में जिला संगठन का नाम लिखे होने के बावजूद, दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का कोष रखने वाला दल अपने खाते से खर्च करने के बजाय मंदिर का पैसा उपयोग कर रहा है। मंदिर की मर्यादाओं का उल्लंघन: मंदिर में तेल का पूरी तरह निषेध होने के बावजूद तेल का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, शाम साढ़े चार से सात बजे तक माताजी के विश्राम का समय होता है, परंतु शाम सवा पांच बजे राजनीतिक दल के कार्यक्रम के लिए नियम तोड़कर आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। निविदा के बिना कार्य: पचास हजार रुपये से अधिक के कार्य के लिए निविदा अनिवार्य होने के बावजूद लाखों रुपये के कार्य केवल तीन दर-पत्र मंगवाकर पसंदीदा एजेंसी को सौंप दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

अति विशिष्ट लोगों की खातिरदारी और पुराने घोटालों का हिसाब बाकी

पहले भी अति विशिष्ट संस्कृति के नाम पर मंदिर के खजाने से चाय के सात सौ बीस रुपये और भोजन की थाली के एक हजार छह सौ चालीस रुपये जैसे अकल्पनीय दरों पर ग्यारह लाख पैंतीस हजार रुपये चुकाए गए थे। सूचना के अधिकार द्वारा यह भी सिद्ध हुआ था कि बाइस लाख रुपये से अधिक की राशि नेताओं और अधिकारियों की खातिरदारी में लुटा दी गई थी, जो आज तक न्यास को वापस नहीं मिली है।

महानगर मेट्रो की मुख्य मांगें

१. छिहत्तर हजार दीपों के उत्सव का बीस लाख रुपये का खर्च किसने उठाया उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
२. दर्शन बंद होने के समय राजनीतिक दल को अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
३. मंदिर न्यास की सभी बची हुई लेखा-परीक्षा रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाएं।
४. अति विशिष्ट लोगों की खातिरदारी के नाम पर खर्च किए गए तैंतीस लाख रुपये से अधिक के पैसे ब्याज के साथ न्यास के खाते में वापस जमा कराए जाएं।
मंदिर के पैसे का दुरुपयोग तुरंत बंद नहीं हुआ और हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया तो महानगर मेट्रो जनता को साथ लेकर तीव्र आंदोलन करेगी।

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