गांधीनगर। गुजरात की राजधानी गांधीनगर से कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली अत्यंत चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जनता की सुरक्षा के लिए वर्दी पहनने वाली एक महिला पुलिस आरक्षी द्वारा आत्मघात कर लेने से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। परंतु, इस घटना में सबसे हृदयविदारक मोड़ तब आया जब मृतका की मां ने मीडिया के समक्ष आकर गांधीनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
खाकी वर्दी भी लाचार: चेतन कमांडो पर आरोप के बावजूद प्राथमिकी क्यों नहीं?
मृतक महिला आरक्षी की पीड़ित मां ने रोते हुए खुलासा किया कि, “मेरी बेटी ने चेतन कमांडो के उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के कारण ही यह आत्मघाती कदम उठाया है!” मां का आरोप है कि वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए गांधीनगर सेक्टर-७ पुलिस थाने के चक्कर काट रही हैं, परंतु स्थानीय पुलिस अपने ही विभाग के आरोपी चेतन कमांडो को बचाने के लिए प्राथमिक प्राथमिकी दर्ज करने से स्पष्ट इनकार कर रही है।
महानगर मेट्रो के सीधे सवाल: यदि महिला पुलिस असुरक्षित, तो आम जनता का क्या?
जिस राज्य में गृह विभाग अपनी सख्त छवि की बात करता है, वहां राजधानी में ही घटी इस घटना से बुनियादी सवाल खड़े होते हैं: पुलिस ही पुलिस की नहीं सुन रही: जो महिला स्वयं पुलिस विभाग में सेवा दे रही थी, उसे आत्महत्या के लिए विवश करने वाले के विरुद्ध यदि पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं कर रही, तो सामान्य नागरिक या पीड़ित महिला जब शिकायत लेकर जाए तब उसके साथ कैसा व्यवहार होता होगा? किसके इशारे पर चेतन कमांडो को संरक्षण? अपने ही विभाग के एक कमांडो को बचाने के लिए गांधीनगर पुलिस इतनी विवश क्यों दिख रही है? क्या पुलिस विभाग में वर्दी का रोब दिखाकर सहयोगियों का शोषण करने वालों को खुली छूट मिल गई है? गृह विभाग की मौन सहमति? गांधीनगर में ही एक पीड़ित मां न्याय के लिए गुहार लगा रही है, फिर भी प्रशासन क्यों अनदेखा कर रहा है?
न्याय की मांग और आक्रोश
मृतका के परिवार ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि चेतन कमांडो के विरुद्ध तत्काल मामला दर्ज करके उसकी गिरफ्तारी नहीं की गई, तो वे तीव्र आंदोलन का मार्ग अपनाएंगे। महानगर मेट्रो प्रशासन से सीधा प्रश्न पूछता है कि – क्या इस मामले में कानून सबके लिए समान रहेगा या फिर पुलिस अपने ही अपराधी को बचाने के लिए ऐसे ही लीपापोती करती रहेगी?

