ब्यावरा-सोनकच्छ के बीच निर्मित 24.5 किमी लंबे ट्रैक पर सफल ट्रायल रन हुआ है। 24.5 किमी लंबे ट्रैक पर पहली बार 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ी है। इस ट्रायल रन से वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है।
हाइलाइट्स
रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन परियोजना का ट्रैक निर्माण
24.5 किमी के ट्रायल रन में मिली बड़ी सफलता
226 किलोमीटर लंबे ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है
रेल सुरक्षा आयुक्त ने ट्रैक का किया था निरीक्षण
राजगढ़ : मध्य प्रदेश के रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल परियोजना के तहत शुक्रवार को ब्यावरा-सोनकच्छ के बीच ट्रायल रन हुआ। ब्यावरा-सोनकच्छ के बीच निर्मित 24.5 किमी लंबे ट्रैक पर पहली बार 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ी। ब्यावरा और नरसिंहगढ़ के सोनकच्छ के बीच पहली बार ट्रेन गुजरने पर लोगों का बरसों पुराना सपना पूरा हो गया है।
अंतिम औपचारिकता की मंजूरी मिलना बाकी
ट्रेन का ट्रायल पूरा होने के बाद अब रेलखंड के द्वारा यात्री और मालगाड़ियों के संचालक के लिए केवल अंतिम औपचारिकता को मंजूरी मिलना बाकी है। रामगंजमंडी भोपाल रेल परियोजना के तहत 276 किलोमीटर लंबे ट्रैक में अब तक 226 किलोमीटर लंबे ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, भोपाल मंडल के अंतर्गत आने वाले 111 किलोमीटर लंबे ट्रैक में 80 किलोमीटर ट्रैक का किया जा चुका है।
कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले 165 किलोमीटर लंबे ट्रैक में 146 किलोमीटर ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है। जिसमें घाटोली तक ट्रेन का संचालक पर रेलवे के द्वारा किया जा रहा है।
दो दिन के दौरे पर थी सीआरएस की टीम
रामगंजमंडी भोपाल रेलवे लाइन को लेकर मुम्बई से आए रेल सुरक्षा आयुक्त सीआरएस गुरू प्रकाश और उनकी टीम दो दिवसीय दौर पर थी। टीम के द्वारा ब्यावरा और सोनकच्छ के बीच 24.5 किमी ट्रैक पर ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर ट्रायल को सफलता पूर्वक पूरा किया। इस दौरान सीआरएस ने मोटर ट्रॉली से नए रेलवे ट्रैक का बारिकी से निरीक्षण भी किया। इस दौरान मिली छोटी-मोटी कमियों को तत्काल प्रभार से सुधारने के निर्देश भी दिए गए।
एमपी के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी
ब्यावरा-सोनकच्छ रेल लाइन का ट्रायल
120 किमी की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन
सुरक्षा व्यवस्था की जांच हुई
फुटओवर ब्रिज के निरीक्षण के बाद सीआरएस टीम उप स्टेशन प्रबंधक कार्यालय पहुंची, जहां ट्रेनों के आवागमन और संचालन से संबंधित जानकारी ली गई। इसके उपरांत सिग्नल कार्यालय का निरीक्षण किया गया, जहां सिग्नल से जुड़ी मशीनरी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई।

