गुजरात में गांधी की होम डिलीवरी के बाद अब नकली शराब का प्रोडक्शन, बूटलेगर के कारनामे देखकर पुलिस भी हैरान
भावनगर से एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने राज्य में शराबबंदी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां, एक लोकल बूटलेगर ने नकली शराब बनाने का प्लान बनाया था। इतना ही नहीं, इस काले धंधे को अंजाम देने के लिए मध्य प्रदेश (MP) से एक स्पेशल नकली शराब एक्सपर्ट टीम को भावनगर बुलाया गया था। पुलिस ने रेड करके इस स्कैम का भंडाफोड़ तो कर दिया है, लेकिन भावनगर पुलिस की फिलहाल नींद उड़ी हुई है क्योंकि रेड के दौरान 170 नकली शराब की बोतलें गायब मिलीं।
शराब की फैक्ट्री लगाई थी
भावनगर के बूटलेगर ने विदेशी शराब की ज़्यादा डिमांड और कमाई के लालच में, बाहर से ब्रांडेड शराब इंपोर्ट करने के बजाय इसे लोकल लेवल पर बनाने का प्लान बनाया था। MP से आई टीम ने लोकल केमिकल, एसेंस और बॉटलिंग मटीरियल का इस्तेमाल करके बेबे हुबू ब्रांड की शराब जैसी नकली शराब बनाना शुरू कर दिया था। यह शराब सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक और ज़हरीली साबित हो सकती थी।
170 बोतलें मार्केट में आ गईं? पुलिस दौड़ी
सूचना मिलने पर पुलिस ने छापा मारा और नकली शराब बनाने का सेटअप और सामान ज़ब्त कर लिया। लेकिन शुरुआती जांच का जायज़ा लेने पर पता चला कि तैयार की गई बोतलों में से लगभग 170 नकली शराब की बोतलें गायब थीं। पुलिस इस बात को लेकर बहुत सस्पेंस में है कि क्या शराब तस्कर ने इन बोतलों को मार्केट में बेच दिया है या कहीं और छिपा दिया है। अगर यह ज़हरीली नकली शराब लोगों तक पहुंच गई तो बड़े हादसे का डर है।
सिस्टम के लिए बड़ा सवाल: टीम बॉर्डर पार क्यों गई?
दूसरी ओर, यह बात कि मध्य प्रदेश से पूरी टीम भावनगर पहुंच गई और लोकल पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी, पुलिस के इंटेलिजेंस सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह मामला इस बात का जीता जागता सबूत है कि गांधी के गुजरात में शराबबंदी सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित रही। फिलहाल, पुलिस फरार शराब तस्कर और गायब 170 बोतलों की तलाश में सभी दिशाओं में जुट गई है।

