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सत्ता की गद्दी पर क्राइम का साया! देश के 45% मुख्यमंत्रियों के खिलाफ क्रिमिनल केस, एक जानी-मानी संस्था की रिपोर्ट से पॉलिटिक्स में हलचल!

क्या डेमोक्रेसी के सबसे बड़े मंदिर के रखवाले ही सिर्फ आरोपी हैं? एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच के चौंकाने वाले डॉक्यूमेंट्स जारी — 45% CMs के खिलाफ लीगल एक्शन, 35% पर बहुत गंभीर क्राइम के आरोप!

जिनके हाथ में लॉ एंड ऑर्डर की बागडोर है, जिनके ऑर्डर पर पूरा पुलिस सिस्टम काम करता है, अगर वही अधिकारी खुद कोर्ट के कटघरे में खड़े हों, तो जनता किससे सिक्योरिटी की उम्मीद करे? एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की तरफ से देश के सभी 31 मौजूदा मुख्यमंत्रियों (28 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश) के इलेक्शन एफिडेविट के आधार पर जारी ऑफिशियल रिपोर्ट ने भारतीय पॉलिटिक्स का काला चेहरा सामने ला दिया है। चुनावों के दौरान खुद उम्मीदवारों के एफिडेविट का एनालिसिस करने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि डेमोक्रेसी के भविष्य पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाते हैं।

आंकड़ों की चौंकाने वाली सच्चाई: 45% अधिकारी ‘दागी’ हैं!

14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ क्रिमिनल केस: देश के 31 मुख्यमंत्रियों में से 14 (45%) ने खुद अपने एफिडेविट में माना है कि उनके खिलाफ अलग-अलग कोर्ट में क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं।

11 CMs पर ‘बहुत गंभीर’ क्राइम: 14 में से 11 CMs (35%) के खिलाफ नॉन-बेलेबल और गंभीर क्रिमिनल केस दर्ज हैं, जिनमें 5 साल या उससे ज़्यादा की सज़ा हो सकती है।

मर्डर की कोशिश और रेप के आरोप: दो CMs पर ‘मर्डर की कोशिश’ जैसे गंभीर आरोप हैं, जबकि दूसरे अधिकारियों पर महिलाओं के खिलाफ रेप, दंगे भड़काने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने जैसे गंभीर आरोप कोर्ट में दर्ज हैं।

कौन सा राज्य कहां है? केस की लिस्ट में ‘टॉप’ पर कौन है? ADR रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज़्यादा रजिस्टर्ड क्रिमिनल केस की लिस्ट में साउथ और ईस्ट इंडिया के राज्यों के मुख्यमंत्री टॉप पर हैं:

  1. तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (टॉप): रेवंत रेड्डी इस लिस्ट में सबसे ज़्यादा केस वाले मुख्यमंत्री के तौर पर उभरे हैं, उनके नाम पर 89 से ज़्यादा लीगल चार्ज/केस रजिस्टर्ड हैं।
  2. पश्चिम बंगाल के विपक्ष/नेता और दूसरे: पश्चिम बंगाल, कर्नाटक के डीके शिवकुमार (जिनके खिलाफ 19 से ज़्यादा केस हैं) और झारखंड के हेमंत सोरेन जैसे नेता भी गंभीर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
  3. कई तरह के गंभीर क्राइम: इन नेताओं पर रॉबरी, क्रिमिनल इंटिमिडेशन और सरकारी काम में रुकावट डालने जैसे केस लटके हुए हैं।

करोड़ों की संपत्ति और क्राइम का बुरा चक्कर

इसी रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह है कि देश के मुख्यमंत्रियों की एवरेज संपत्ति ₹118.07 करोड़ है! एक तरफ देश का आम नागरिक महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ ये भ्रष्ट नेता अरबपति बनकर सत्ता का मज़ा ले रहे हैं।

पैसे और बाहुबल का यह मेल इस बात का सबूत है कि पार्टी कोई भी हो, सत्ता के शिखर तक पहुंचने के लिए कानून को अपनी जेब में रखने की आदत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता और जनता के सामने एक बड़ा सवाल

सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार आदेश दे चुका है कि राजनीतिक पार्टियों को अपने उम्मीदवारों का क्रिमिनल रिकॉर्ड अखबारों और वेबसाइट पर पब्लिश करना होगा और उन्हें टिकट देने का कारण भी बताना होगा। फिर भी, राजनीतिक पार्टियां ‘जीतने की काबिलियत’ के नाम पर सिर्फ क्रिमिनल अतीत वाले लोगों को ही टिकट दे रही हैं।

गुजरात का मुश्किल सवाल:

जब राज्य के कानून बनाने वाले ही कानून के आरोपी होंगे, तो क्या भ्रष्टाचार और अपराध खत्म करने की बातें सिर्फ चुनावी भाषणों तक ही सीमित रहेंगी? वोट देने से पहले जनता को यह सोचने की ज़रूरत है कि वे अपने भविष्य की बागडोर किसके हाथों में सौंप रहे हैं!

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