मध्य प्रदेश के कूनो-चंबल इलाके में 10 तेंदुओं की हत्या और वन्यजीव अंगों की तस्करी के मामले में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने दिल्ली पुलिस के एक बर्खास्त सिपाही को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी अंतरराज्यीय शिकार नेटवर्क का अहम कड़ी बताया जा रहा है।
मुरैना: मध्य प्रदेश के चर्चित कूनो-चंबल इलाके में 10 तेंदुओं की निर्मम हत्या और तस्करी के मामले में राज्य के वन विभाग की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसटीएफ ने दिल्ली पुलिस के एक बर्खास्त सिपाही को राष्ट्रीय राजधानी से गिरफ्तार किया है, जो इस अंतरराज्यीय अवैध शिकार और तस्करी के नेटवर्क का एक मुख्य मोहरा माना जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की जांच अब एक बड़े वन्यजीव संरक्षण एनजीओ (NGO) की कथित भूमिका तक भी पहुंच गई है।
कैसे खुला शिकार और तस्करी का यह जाल?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब 23 जुलाई को आगरा में तेंदुओं की 10 खालें बरामद की गईं, जिसके बाद जांच के तार सीधे मध्य प्रदेश के कूनो-चंबल जंगलों से जुड़ गए। इसके बाद STSF की टीमों ने श्योपुर और मुरैना जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से तेंदुओं के अंग, कंकाल और तीन विशेष लेग-होल्ड ट्रैप (फंदे) बरामद किए थे। वे सभी आठ आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं।
जांच को आगे बढ़ाते हुए संयुक्त टीम ने मंगलवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बिजवासन निवासी और बर्खास्त सिपाही भगवान सिंह उर्फ सलीम को दिल्ली से दबोच लिया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी को शिवपुरी की एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एसटीएफ विस्तृत पूछताछ के लिए उसका वन रिमांड मांगेगी। इस बात की भी गहराई से जांच की जा रही है कि क्या इन तेंदुओं का शिकार किसी ‘कॉन्ट्रैक्टुअल पोचिंग’ (अनुबंध पर शिकार) के तहत किया गया था या नहीं।
कूनो-चंबल क्षेत्र में 10 तेंदुओं की हत्या के मामले में बड़ी गिरफ्तारी।
दिल्ली पुलिस का बर्खास्त सिपाही भगवान सिंह उर्फ सलीम गिरफ्तार।
आगरा में 10 तेंदुए की खाल मिलने के बाद शुरू हुई थी जांच।
श्योपुर और मुरैना से पहले ही 8 आरोपियों को भेजा जा चुका है जेल।
मामले में किसी बड़े वन्यजीव संरक्षण एनजीओ की भूमिका की भी हो रही जांच।

