वडोदरा (स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव):: क्या कल्चरल सिटी वडोदरा में अब एंटी-सोशल एलिमेंट्स और नारकोटिक्स की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाना क्राइम बनता जा रहा है? JP रोड पुलिस ने अचानक वडोदरा शहर के JP रोड थाना इलाके में ड्रग्स और नारकोटिक्स की खुलेआम बिक्री को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने वाली महिला तमन्ना सैयद और उसके पति के खिलाफ एक्सटॉर्शन का केस दर्ज कर कपल को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे काफी हंगामा हुआ।
एक तरफ जहां लोगों से शराबबंदी और लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने में पुलिस की मदद करने की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बुरे लोगों के खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ केस दर्ज करके पुलिस की चैरिटी पर गंभीर शक जताया गया है।
परिवार का सुलगता आरोप: “पुलिस के खिलाफ बोलने की सज़ा मिली!”
हिरासत में लिए गए कपल के परिवार ने पुलिस सिस्टम पर हमला करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि इलाके में चल रहे ड्रग्स के धंधे और पुलिस की निष्क्रियता के बारे में वीडियो बनाकर सच्चाई सामने लाई गई थी। जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो जेपी रोड पुलिस के काम की धुलाई हो गई। बदला लेने और अपना बचाव करने के लिए पुलिस ने यह झूठा और मनगढ़ंत एक्सटॉर्शन का केस दर्ज किया है और कपल की आवाज को दबा दिया है।
पुलिस का बूटलेगर-एंटीसोशल एलिमेंट्स के साथ ‘गठबंधन’? जनता के तीखे सवाल
यह तो सब जानते हैं कि वडोदरा शहर के कोने-कोने में शराब, जुआ और ड्रग्स का धंधा फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासी और जागरूक नागरिक अब सीधे सवाल उठा रहे हैं:
एक्सटॉर्शन बंद होने का डर?: क्या यह डर है कि अगर एंटीसोशल धंधे बंद हो गए तो पुलिस को मिलने वाली कथित ‘एक्सटॉर्शन’ बंद हो जाएगी, इसीलिए सिर्फ आवाज उठाने वालों को ही टारगेट किया जाता है? मुखबिर या अपराधी?: ड्रग्स के धंधे का पर्दाफाश करने वाले नागरिक की जानकारी पर कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस उनके खिलाफ जुर्म दर्ज करके क्या साबित करना चाहती है?
नागरिकों की सुरक्षा का क्या?: अगर सोशल मीडिया पर सच बताने वालों का यह हाल है, तो एक आम नागरिक असामाजिक तत्वों के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत कैसे कर सकता है?
सरकार और बड़े पुलिस अधिकारियों के सामने चुनौती
एक तरफ राज्य सरकार ‘ड्रग फ्री गुजरात’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर जेपी रोड पुलिस स्टेशन जैसी गतिविधियों से सरकार के इन दावों की हवा निकल रही है। वडोदरा पुलिस कमिश्नर और राज्य के गृह विभाग को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए और जेपी रोड पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए। अगर सच में ड्रग्स का धंधा चल रहा है, तो सबसे पहले उन शराब तस्करों और उन्हें पनाह देने वाले खाकी वर्दी वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि आवाज उठाने वाले नागरिकों पर!

