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“भले ही खाना बेचने वाला और सेवा करने वाली माँ हो, फिर भी किसान भूखा है!” – अंकित चावड़ा का डबल इंजन सरकार पर हमला

गांधीनगर (स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव) : “भले ही खाना बेचने वाला और सेवा करने वाली माँ हो, फिर भी बेटे को मानसून में भूखा सोना पड़ता है…” – कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने इस तीखे बयान के साथ BJP सरकार पर तीखा हमला किया है। दोनों जगहों – दिल्ली में केंद्र सरकार और राज्य में गांधीनगर सरकार – पर BJP की ‘डबल इंजन’ सरकार होने के बावजूद उन्होंने आरोप लगाया है कि दुनिया की दौलत माने जाने वाले गुजरात के किसान आज आर्थिक तंगी और नाइंसाफी से जूझ रहे हैं।

गुजरात जैसे खुशहाल राज्य में किसानों की कमाई के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आने के बाद, खेती-बाड़ी की दुनिया में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ भारी नाराजगी है।

किसानों की हालत: कमाई कम, खर्च में 30 से 60% की भयानक बढ़ोतरी!
अमित चावड़ा ने असली आंकड़ों का हवाला देकर सरकार की पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक:
महीने की इनकम सिर्फ़ ₹12,631: डबल इंजन सरकार के दावों के बीच, गुजरात में एक किसान परिवार की औसत महीने की इनकम घटकर सिर्फ़ ₹12,631 रह गई है।

खेती की लागत में भारी उछाल: महंगे बीज, पेस्टीसाइड, फर्टिलाइज़र और डीज़ल की आसमान छूती कीमतों की वजह से खेती में प्रोडक्शन की लागत 30% से 60% तक बढ़ गई है।

सही दामों की कमी: एक तरफ़ मेहनत और खेती की लागत दोगुनी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ़ जब किसान अपनी फ़सल बाज़ार में बेचने जाता है, तो उसे सही या सस्ता दाम (MSP) नहीं मिलता।

“BJP ने किसानों को अटूट वोट बैंक मानकर नाइंसाफ़ी की है” – अमित चावड़ा

BJP सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा है कि BJP ने किसानों को अपना ‘पक्के वोट बैंक’ समझ लिया है। चुनावों के दौरान बड़े-बड़े वादे और किसान-हितैषी योजनाओं की घोषणा की जाती है, लेकिन असल में किसानों का शोषण हो रहा है। हुक्मरानों से सीधे सवाल:

  1. विज्ञापन बंद करो, काम करो: भारी खर्च करके बनाए गए होर्डिंग्स और विज्ञापनों को बंद करके किसानों को उनकी मेहनत की सही कीमत कब दी जाएगी?
  2. इनकम दोगुनी करने का वादा कहाँ है?: सालों से किसानों की इनकम दोगुनी करने के दावे किए जा रहे थे, फिर आज आंकड़ों में महीने की इनकम इतनी कम क्यों है?
  3. फर्टिलाइजर और डीजल में राहत कब मिलेगी?: GST और खेती के ज़रूरी औजारों और फर्टिलाइजर पर टैक्स कम करके किसानों को सीधी राहत क्यों नहीं दी जा रही है?

जनता और किसानों की बुलंद आवाज़

अगर अन्नदाता कर्ज में डूबे और दुखी रहेंगे, तो देश या राज्य कभी तरक्की नहीं कर पाएगा। अब समय की मांग है, सिर्फ कागजों पर योजनाएं नहीं, बल्कि किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम और खेती के खर्च पर सीधी सब्सिडी मिले। हुक्मरानों को समझना होगा कि अगर किसानों का गुस्सा बाहर आ गया, तो कोई भी ‘डबल इंजन’ उसे रोक नहीं पाएगा।

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