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नवापुर बना काले कारोबार का केंद्र: क्या गुजरात बॉर्डर पर फल-फूल रहे जुए के अड्डों पर कानून खामोश है?

नंदुरबार। महाराष्ट्र के नंदुरबार ज़िले का सीमावर्ती शहर नवापुर अब खाकी की छत्रछाया में गैर-कानूनी गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन गया है। गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर बसा यह शहर अब अपराध और करोड़ों के जुए के अड्डों का गढ़ बन चुका है। स्थानीय नागरिकों और सूत्रों के मुताबिक, कानून-व्यवस्था के बावजूद यहां हर दिन करोड़ों रुपये का काला कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन कानून के रखवाले आंखें मूंदे बैठे हैं।
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ये जुए के अड्डे मुख्य रूप से नवापुर पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर दो जगहों पर चल रहे हैं।

जगह 1: जान तालाब हनुमान मंदिर के पास और जिंदल पेट्रोल पंप के पीछे एक बंगला, जहां बहुत ही गुप्त तरीके से हाई-प्रोफाइल खिलाड़ियों के लिए खेलों का इंतजाम किया जाता है।

जगह 2: विसरवाड़ी इलाके में एकता होटल के पीछे एक खास पक्का शेड बनाकर बनाया गया एक और बड़ा अड्डा।
यह पूरा काला कारोबार राकेश गोसावी उर्फ ​​पप्पू गोसावी, राइस शेख और सूरज जायसवाल नाम का एक सिंडिकेट चला रहा है। यहां मुख्य रूप से ‘आसरो’ (नंबरों का जुआ) और ‘त्रण पत्ती’ जैसे जोखिम भरे खेल खेले जाते हैं।

गुजरात के हर कोने से आते हैं जुआरी: हर दिन करोड़ों रुपये की हार-जीत का खेल

ये अड्डे सिर्फ स्थानीय लोगों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि पड़ोसी राज्य गुजरात के वापी, वलसाड, सूरत, भरूच और अंकलेश्वर जैसे औद्योगिक शहरों के मशहूर और अनजान जुआरी भी गाड़ियों के काफिले के साथ यहां पहुंचते हैं। यहां दिन-रात करोड़ों रुपये की हार-जीत होती है। अड्डों के बाहर गुजरात की महंगी लग्ज़री गाड़ियों का जमावड़ा यहां चल रहे खेल के स्तर का साफ सबूत है। इतनी सारी गाड़ियों की आवाजाही के बावजूद स्थानीय पुलिस को कुछ दिखाई नहीं देता, यही सबसे बड़ा सवाल है।

किस्त का राज या भ्रष्टाचार की हद? PI और उच्च अधिकारियों की भूमिका शक के घेरे में

स्थानीय निवासियों द्वारा नवापुर पुलिस स्टेशन के PI अभिषेक पाटील को बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतें करने के बावजूद, आज तक एक भी छापा नहीं मारा गया है। इस पूरे मामले में न सिर्फ़ स्थानीय PI, बल्कि नंदुरबार के SP अश्विनी सानप और IG संजय यानपुरे से भी शिकायत की गई है। हालांकि, ऊंचे स्तर से कोई कार्रवाई न होने के कारण ऐसी चर्चा है कि लाखों रुपये की मासिक ‘किश्तों’ की वजह से सिस्टम बेबस हो गया है। हैरानी की बात है कि जो नागरिक या पत्रकार इस काले धंधे के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है या झूठे केस में फंसाया जाता है।

पुरानी यादें: जब IG शेखर साहब ने PI को सस्पेंड किया था

इससे पहले भी ‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ ने इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश किया था। उस समय, तत्कालीन IG शेखर साहब ने तुरंत और सख्त कार्रवाई करते हुए राइस शेख के ठिकानों पर छापा मारा था। उस समय मौके से करोड़ों रुपये का सामान ज़ब्त किया गया था और लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन नवापुर PI को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया था।

जनता का बस एक ही सवाल है: क्या कोई पुलिस अधिकारी इस जुए के अड्डे पर छापा मारेगा?

पहले सख्त कार्रवाई के बावजूद, अभी नवापुर पुलिस स्टेशन एक बार फिर अपराधियों का अड्डा बन गया है। PI अभिषेक पाटिल और SP मैडम की रहस्यमयी चुप्पी और कार्रवाई न करने को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। क्या नंदुरबार ज़िले में कानून का राज खत्म हो गया है? क्या यह ‘किश्त’ वाला खेल ऐसे ही चलता रहेगा या कोई हिम्मत वाला और ईमानदार पुलिस अधिकारी आकर करोड़ों के इस जुए के अड्डे को खत्म करेगा? जनता अब ऊंचे स्तर से सख्त और ठोस कार्रवाई का इंतज़ार कर रही है।

बंगले से शेड तक काले धन का नेटवर्क: नवापुर वापी से अंकलेश्वर तक के जुआरियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया है
लग्ज़री कारें और ‘असारो-त्रनपत्ती’ का खेल: कानून के रखवाले कब तक आंखें मूंदे बैठे रहेंगे?
पुलिस की वसूली और धमकियों के लिए:
PI अभिषेक पाटिल और उच्च अधिकारियों से शिकायत के बावजूद चुप्पी: क्या लाखों की मासिक किश्तों में खाकी बिक गई है?
घोटाले का पर्दाफाश करने वालों को धमकी: अपराधी बेखौफ हैं, जनता और स्थानीय लोग बहुत नाराज़ हैं
पुराने समय से तुलना और सवाल:
IG शेखर साहब का वह छापा और PI का सस्पेंशन याद है: क्या इस बार भी ऊंचे स्तर से कोई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ होगी?
SP और IG की चुप्पी पर कई सवाल: क्या नवापुर में कानून का राज है या जुआरियों का?

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