गांधीनगर (विशेष प्रतिनिधि): राज्य की राजधानी और VIP शहर माने जाने वाले गांधीनगर में सड़कों की हालत आज इतनी खराब हो गई है कि स्थानीय जागरूक नागरिकों का आपा खो गया है। “गांधीनगर की इस सड़क का डामर किसने खाया? जलसा कर बाबू जलसा कर, लोग तेल खरीदने जाएं!” – इस तरह के तीखे और तीखे हमलों के साथ गांधीनगर के निवासियों ने शासकों और ठेकेदारों की मिलीभगत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
एक तरफ राजधानी में बड़ी-बड़ी पार्टियों, कार्यक्रमों और इवेंट्स पर अरबों रुपये बर्बाद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिन सड़कों से लोग हर दिन गुजरते हैं, उनसे डामर गायब हो गया है और सिर्फ गड्ढे और बजरी बची है!
“पहले सड़कें और सीवर ठीक करो, फिर वाहवाही लूटो!” – जागरूक नागरिकों की पुकार
गांधीनगर के हर कोने से अब एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है कि प्रशासन और नेता अपनी शान छोड़कर पहले ज़रूरी मुद्दों को हल करें।
टूटी-फूटी सड़कें और सड़क हादसे: राजधानी के कई सेक्टरों और मुख्य सड़कों से डामर की परत गायब हो गई है। मानसून के बाद या मरम्मत के बाद भी सड़कें कुछ ही दिनों में टूट जाती हैं। ये टूटी-फूटी सड़कें गाड़ी चलाने वालों की कमर तोड़ रही हैं और हादसों को खुला न्योता दे रही हैं।
सीवर ओवरफ्लो होने की गंभीर समस्या: कई इलाकों में सीवर लाइनें जाम होने से गंदा पानी वापस सड़कों पर बह रहा है। गंदगी और बदबू के कारण स्थानीय निवासियों का जीना हराम हो गया है और उन्हें बीमारी फैलने का डर सता रहा है।
सरकारों और ठेकेदारों के खिलाफ जनता के तीखे सवाल
राजधानी के जागरूक नागरिक अब सीधे और जानलेवा सवाल पूछ रहे हैं:
- डामर कौन खा गया?: नई बनी सड़कें कुछ ही महीनों में क्यों बह जाती हैं? भ्रष्ट ठेकेदारों और अधिकारियों की कमीशनखोरी का शिकार जनता क्यों बने? 2. टैक्स के पैसे का हिसाब कहाँ है?: अगर लोगों से रेगुलर तौर पर इकट्ठा होने वाले टैक्स के पैसे का इस्तेमाल सड़कों और सीवर को ठीक करने में नहीं किया जा रहा है, तो उस पैसे का इस्तेमाल किस ‘जलसे’ में किया जा रहा है?
- दिक्कतें कब तक पक्की हल होंगी?: सिस्टम गांधीनगर के लोगों की बुनियादी दिक्कतें जैसे सड़कें, सीवर और सफाई, उन्हें हल करने में फेल क्यों हो रहा है?
सिस्टम के लिए खतरे की घंटी
गांधीनगर के लोग अब चुप बैठने को तैयार नहीं हैं। अगर टूटी सड़कों और रास्तों की क्वालिटी रिपेयर तुरंत नहीं की गई और सीवर की दिक्कतें हल नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में गांधीनगर के लोग सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध करेंगे। हुक्मरानों को ‘जलसा’ बंद करके लोगों के काम पर ध्यान देना चाहिए!

