गांधीनगर के पास माधवगढ़ गांव में चार महीने पहले यानी अप्रैल में हुई एक दुखद घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। एक सरकारी स्कूल को गिराने के काम के दौरान, प्रशासन और ठेकेदार की बड़ी लापरवाही के कारण आधी-अधूरी दीवार गिर गई, जिसमें चौथी क्लास में पढ़ने वाले एक छोटे मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई।
पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए भटक रहा है
घटना को 111 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार सिर्फ सवालों और इंसाफ की उम्मीद का इंतजार कर रहा है। प्रशासन के बड़े-बड़े दावों और जांच के आश्वासन के बावजूद, अभी तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार वाले फूट-फूट कर रो रहे हैं, क्या एक गरीब या आम परिवार के मासूम बच्चे की जान इतनी सस्ती है? रक्षाबंधन पास आते ही बहनों का भाई नहीं रहा
जैसे-जैसे त्योहार पास आ रहे हैं, इस घटना से पूरा परिवार टूट गया है। चारों छोटी बहनों का एक प्यारा भाई था जो अब इस दुनिया में नहीं रहा। इस रक्षाबंधन पर चारों बहनें किसके हाथ में राखी बांधेंगी? यह सवाल सिर्फ परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के मन में एक ज्वलंत सवाल है।
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल:
स्कूल गिराते समय सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया?
अधूरी और खतरनाक दीवार को खुला छोड़ने वाले ठेकेदार या अधिकारी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
111 दिन बाद भी क्या सरकार इस घटना को गंभीरता से लेगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगी?
माधवगढ़ गांव और स्थानीय लोगों की बस यही मांग है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज किया जाए और सख्त कार्रवाई की जाए ताकि मासूम बच्चे की आत्मा को शांति मिल सके और पीड़ित परिवार को सच्चा न्याय मिल सके।

