नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में भर्ती प्रक्रिया से लेकर एडमिनिस्ट्रेशन तक बड़ा खेल: विपक्ष के कड़े हमलों के बीच “हमारी सरकार में कोई इस्तीफा नहीं होता”
देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पेपर लीक कांड के बाद पूरे देश में लोगों का गुस्सा चरम पर है। CBI चार्जशीट में बड़े खुलासे के बाद NTA ने खुद ही पेपर लीक होने का बड़ा खुलासा किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब केंद्र सरकार और सत्ताधारी पार्टी विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
NTA में भर्ती का स्ट्रक्चर और विवादों का दायरा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में भर्ती मुख्य रूप से केंद्र सरकार डायरेक्ट रिक्रूटमेंट, डेपुटेशन (यानी दूसरे सरकारी डिपार्टमेंट से कर्मचारियों का सिलेक्शन) और कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर करती है। लेकिन अब इस भर्ती प्रक्रिया और अहम पदों पर पॉलिसी फैसले लेने वाले लोगों की भूमिका पर कई शक और सवाल उठ रहे हैं।
“हमारी सरकार में कोई इस्तीफा नहीं होता”: राजनीतिक घमासान
पेपर लीक के गंभीर विवादों के बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद राजनीति और गरमा गई है कि “हमारी सरकार में कोई इस्तीफा नहीं होता”। राजनीतिक विश्लेषकों और सूत्रों के मुताबिक, मूडीज ग्रुप किसी भी मंत्री या जिम्मेदार व्यक्ति को शिकार नहीं बना रहा है। ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि शिक्षा मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय या राम मंदिर ट्रस्ट तक अहम पदों पर एक खास विचारधारा और RSS बैकग्राउंड वाले लोगों को नियुक्त किया जा रहा है। प्रह्लाद जोशी जैसे नेता भी 1990 से संघ से जुड़े रहे हैं।
CBI चार्जशीट में धमाका: जनता और युवाओं में भारी गुस्सा
CBI चार्जशीट में खुलासे के बाद यह साफ हो रहा है कि NTA की संलिप्तता और लापरवाही के कारण लाखों छात्रों की मेहनत बर्बाद हो गई है। पेपर लीक कांड सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम की बड़ी नाकामी है। अब देश के कोने-कोने से युवा और माता-पिता सड़कों पर उतरकर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

